
एक्टर इमरान खान। फाइल फोटो- पत्रिका
SIR Protest: बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान ने चुनाव आयोग के खिलाफ मुंबई में हुए प्रदर्शन में शामिल होने पर बॉम्बे हाईकोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसे किसी राजनीतिक प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेंगे। इस मामले में अदालत ने अभिनेता को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि वे भारतीय नागरिक नहीं, बल्कि अमेरिकी नागरिक हैं और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्डधारक होने के नाते उन्हें भारतीय नागरिकों की तरह राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल होने का अधिकार नहीं है। वहीं उन्हें जारी 'लीव इंडिया नोटिस' पर रोक 7 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी।
42 वर्षीय इमरान खान को 10 अक्टूबर को मुंबई में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। इसके बाद विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) ने उन्हें देश छोड़ने का नोटिस जारी किया था। इसी नोटिस को चुनौती देते हुए अभिनेता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान इमरान के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने बताया कि अभिनेता का जन्म अमेरिका में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपना पूरा जीवन भारत में बिताया है। वे बचपन से भारत में रह रहे हैं और यहीं बॉलीवुड में अपना करियर बनाया है।
उन्होंने कहा कि इमरान को प्रदर्शन के आयोजकों से कोई संबंध नहीं था और उन्हें इसमें शामिल होने के परिणामों की पूरी जानकारी भी नहीं थी। इस पर अदालत ने कहा कि भारत में जन्म लेने या रहने से किसी विदेशी नागरिक की कानूनी स्थिति नहीं बदल जाती। पीठ ने सवाल किया कि यदि कोई भारतीय नागरिक अमेरिका में वहां की राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन करे तो उसके साथ क्या व्यवहार होगा। अदालत ने कहा कि इमरान ओसीआई कार्डधारक हैं और उन्हें एसआईआर जैसे राजनीतिक मुद्दों पर प्रदर्शन करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि भारत में रहने और बॉलीवुड में पहचान बनाने के बावजूद उन्होंने भारतीय नागरिकता क्यों नहीं ली।
एफआरआरओ की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने अभिनेता की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट और एक साक्षात्कार का हवाला देते हुए कहा कि इमरान पहले भी कई प्रदर्शनों में शामिल हो चुके हैं और उनके कुछ बयान भी आपत्तिजनक रहे हैं। अदालत ने कहा कि इमरान एक चर्चित अभिनेता हैं और सोशल मीडिया पर उनके बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं। ऐसे में उनके बयानों का असर होता है। पीठ ने स्पष्ट किया कि माफी मांगने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें भविष्य में ऐसे प्रदर्शनों में शामिल होने की छूट मिल गई है। माफी को देश में रहने की मंजूरी नहीं माना जा सकता।
अदालत ने कहा कि विदेशी नागरिकों को भारत में रहने के दौरान देश के राजनीतिक मामलों में इस तरह हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि, इमरान के मामले में देश छोड़ने के नोटिस से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने एफआरआरओ के नोटिस पर फिलहाल रोक लगा दी थी।
Updated on:
2 Nov 2026, 5:40 PM IST
Published on:
2 Nov 2026, 5:26 PM IST
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