13 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

INDIA Bloc Protest: INDIA ब्लॉक के विरोध मार्च पर राम कदम का पलटवार, बोले- सबूत हैं तो अदालत जाएं

Election Commission of India: विपक्ष के विरोध मार्च ने चुनावी पारदर्शिता और संस्थाओं की जवाबदेही पर बहस को फिर हवा दे दी है। भाजपा ने आरोपों के समर्थन में प्रमाण पेश करने की चुनौती देते हुए कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की बात कही है।
2 min read
Google source verification

भारत

•

image

Manoj Vashisth

•

Oct 12, 2026

Ram Kadam

Ram Kadam : (फोटो सोर्स: ANI)

Ram Kadam on INDIA Bloc Protest March: चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। INDIA ब्लॉक के विरोध मार्च पर भाजपा नेता राम कदम ने विपक्षी नेताओं, खासकर राहुल गांधी, को निशाने पर लेते हुए न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच अंतर समझने की नसीहत दी है। उन्होंने निर्वाचन आयोग के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि विपक्ष के पास गड़बड़ी के ठोस सबूत हैं, तो उसे विरोध प्रदर्शन के बजाय संवैधानिक और कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए।

राम कदम ने राहुल गांधी को घेरा, बोले- आरोप लगाने से नहीं, सबूत देने से होगी बात

INDIA ब्लॉक के विरोध मार्च को लेकर भाजपा ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। भाजपा नेता राम कदम ने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ आरोप लगाने से पहले उनके अधिकार क्षेत्र और कामकाज को समझना जरूरी है।

राम कदम के मुताबिक, सरकार या राजनीतिक दलों के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा हो सकता है, लेकिन न्यायपालिका से जुड़े मामलों में उचित कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष को सुझाव दिया कि यदि उसे किसी फैसले या प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो संविधान के तहत याचिका दाखिल कर अपनी बात रखनी चाहिए।

SIR प्रक्रिया पर भी उठाए सवालों का दिया जवाब

भाजपा नेता ने मतदाता सूची से जुड़ी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी SIR का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पहले भी अपनाई जा चुकी है। उन्होंने निर्वाचन आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों के संदर्भ में विपक्ष से ठोस प्रमाण सामने लाने को कहा।

उनका तर्क था कि यदि चुनावी प्रक्रिया में अनियमितता हुई है, तो उसे तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर संबंधित कानूनी मंच पर चुनौती दी जानी चाहिए। केवल आरोपों को बार-बार दोहराने से किसी दावे की पुष्टि नहीं होती।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बहस क्यों अहम?

भारत में निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। मतदाता सूची का पुनरीक्षण इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इससे पात्र मतदाताओं के नाम दर्ज करने और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करने में मदद मिलती है। हालांकि, ऐसी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता, समयसीमा और मतदाताओं को पर्याप्त अवसर मिलने जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस का विषय बन सकते हैं।

ऐसे मामलों में आरोपों की निष्पक्ष जांच, सार्वजनिक जानकारी की उपलब्धता और शिकायतों के प्रभावी निपटारे की व्यवस्था लोकतांत्रिक विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है।

संविधान को लेकर सियासी टकराव तेज

राम कदम ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि संविधान का हवाला देकर निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका को लगातार कटघरे में खड़ा करना संवैधानिक व्यवस्था पर हमला करने जैसा है। उनके बयान से साफ है कि भाजपा इस मुद्दे पर विपक्ष की विरोध रणनीति को राजनीतिक और कानूनी, दोनों स्तरों पर चुनौती देना चाहती है।

बड़ी खबरें

View All

राष्ट्रीय

ट्रेंडिंग