9 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

India Israel Relations: गाजा युद्ध के बीच इजरायल के और करीब आया भारत, मोदी की विदेश नीति में क्या बदला?

India Israel Ties 2026: दुनिया के कई देश इजरायली सरकार से दूरी बना रहे हैं, लेकिन नई दिल्ली के तेवर अलग दिखाई दे रहे हैं। रक्षा सहयोग से लेकर निवेश तक, दोनों देशों की बढ़ती नजदीकी के पीछे केवल कूटनीति नहीं, बल्कि घरेलू राजनीति और सुरक्षा से जुड़े समीकरण भी चर्चा में हैं।
3 min read
Google source verification

भारत

•

image

Manoj Vashisth

•

Oct 09, 2026

India Israel relations

India Israel relations : गाजा युद्ध के बीच इजरायल के करीब भारत, मोदी की विदेश नीति में कितना आया बदलाव? Photo/X@narendramodi)

India Israel Defence Cooperation: गाजा में तबाही, हजारों फिलिस्तीनियों की मौत और इजरायली नेतृत्व के खिलाफ बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विरोध के बीच भारत का इजरायल के साथ रिश्ता एक नए दौर में पहुंच गया है। कभी फिलिस्तीन के अधिकारों का मजबूत समर्थक रहा भारत अब रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग में इजरायल के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आए इस बदलाव ने एक अहम सवाल खड़ा किया है क्या गाजा युद्ध ने भारत की विदेश नीति की दिशा को और स्पष्ट कर दिया है?

गाजा में युद्ध, भारत-इजरायल संबंधों में नई गर्मजोशी

गाजा में जारी युद्ध ने भारत और इजरायल के रिश्तों को अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जहां इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को लेकर कई देशों में असंतोष बढ़ा है, वहीं भारत ने दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के संकेत दिए हैं।

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 में इजरायल के दक्षिणपंथी वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच की भारत यात्रा इस बदलते रुख का अहम उदाहरण बनी। फिलिस्तीनियों के विस्थापन और कब्जे वाले वेस्ट बैंक के विलय संबंधी उनके बयानों के कारण कई देशों ने उन पर प्रवेश प्रतिबंध लगाए थे। इसके बावजूद भारत में उनका स्वागत हुआ। यात्रा के दौरान उन्होंने नई दिल्ली में व्यापार समझौते से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लिया, मुंबई में शेयर बाजार का दौरा किया और गुजरात में निवेश की संभावनाएं देखीं।

2014 के बाद बदली रिश्तों की तस्वीर

भारत लंबे समय तक फिलिस्तीन के स्वतंत्र राष्ट्र के अधिकारों का समर्थन करता रहा है। हालांकि, 1992 में इजरायल के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा। वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद यह साझेदारी अधिक सार्वजनिक और व्यापक हुई।

रक्षा तकनीक, निगरानी प्रणाली, ड्रोन और सैन्य उपकरणों के क्षेत्र में इजरायल भारत का महत्वपूर्ण भागीदार बन गया। रिपोर्ट के अनुसार, गाजा युद्ध के दौरान भी भारत से इजरायल को हथियारों के निर्यात की खबरें सामने आईं। इससे भारत की पारंपरिक कूटनीतिक नीति और उसके व्यावहारिक रणनीतिक हितों के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हुई।

7 अक्टूबर के हमले के बाद बदला राजनीतिक संदेश

हमास के नेतृत्व में 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए हमले के कुछ ही घंटों बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी कड़ी निंदा की थी। उन्होंने इसे आतंकवादी हमला बताते हुए इजरायल के प्रति समर्थन जताया। फरवरी 2026 में इजरायल की अपनी यात्रा के दौरान भी मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति पर जोर दिया।

विश्लेषकों का मानना है कि आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों देशों की समान चिंताओं ने उनके रिश्तों को मजबूत करने में भूमिका निभाई है। नई दिल्ली के राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई के अनुसार, भारत में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिक विचारधारा और इजरायल के साथ संबंधों के बीच वैचारिक समानताओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि, इस साझेदारी के पीछे रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े व्यावहारिक हित भी महत्वपूर्ण हैं।

फिलिस्तीन का सवाल और भारत के सामने कूटनीतिक चुनौती

गाजा में बड़े पैमाने पर जनहानि ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता पैदा की है। अल जजीरा की रिपोर्ट में युद्ध के दौरान कम से कम 74,000 फिलिस्तीनियों की मौत का उल्लेख किया गया है, जिनमें बड़ी संख्या बच्चों की बताई गई है। ऐसे हालात में भारत के सामने इजरायल के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखने और फिलिस्तीनियों के अधिकारों के समर्थन के बीच संतुलन कायम रखने की चुनौती है।

भारत की विदेश नीति के लिए यह संतुलन इसलिए भी अहम है क्योंकि उसके पश्चिम एशिया के देशों के साथ ऊर्जा, व्यापार और प्रवासी भारतीयों से जुड़े व्यापक हित हैं। इजरायल के साथ बढ़ता सहयोग भारत को रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में लाभ दे सकता है, लेकिन फिलिस्तीन के मुद्दे पर उसकी विश्वसनीयता भी उतनी ही महत्वपूर्ण बनी हुई है।

बड़ी खबरें

View All

राष्ट्रीय

ट्रेंडिंग