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कैसे हासिल होगी दालों में आत्मनिर्भरता? 500 करोड़ का रिसर्च बजट, लेकिन एक साल में एक भी प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं

Mission for Aatmanirbharta in Pulses: केंद्र सरकार के दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत पहले साल में ही अनुसंधान परियोजनाओं की मंजूरी में देरी हुई है। अनुसंधान के लिए आवंटित 500 करोड़ रुपये में से अभी तक किसी भी परियोजना को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।
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भारत

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Anand Shekhar

•

Oct 19, 2026

Pulses Mission for Aatmanirbharta

दालों में आत्मनिर्भरता मिशन (फोटो- DD India)

Pulses Mission: देश को दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू किए गए छह साल के दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन (2025-26 से 2030-31) का पहला साल पूरा हो चुका है। इस मिशन के तहत रिसर्च के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन अब तक एक भी रिसर्च प्रोजेक्ट को प्रशासनिक मंजूरी नहीं मिली है। इस देरी पर कैबिनेट सचिवालय की आपत्ति के बाद कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय हरकत में आ गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह प्रस्तावों के मूल्यांकन में तेजी ला रहा है और पात्र प्रोजेक्ट्स को अक्टूबर 2026 के अंत तक औपचारिक मंजूरी दे दी जाएगी।

कैबिनेट सचिव की समीक्षा बैठक में उठा देरी का मुद्दा

5 अक्टूबर को हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान पेंडिंग रिसर्च प्रोजेक्ट्स का मामला सामने आया। कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तिलहन, दालों और कपास से जुड़े कृषि अनुसंधान के पुनर्गठन पर चर्चा की गई। इसमें कृषि सचिव अतिश चंद्र, पर्यावरण सचिव नरेंद्र भूषण और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव मांगी लाल जाट सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

बैठक के दौरान, कैबिनेट सचिवालय के अधिकारियों ने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने राष्ट्रीय दाल मिशन के रिसर्च हिस्से के तहत आए प्रस्तावों के लिए अभी तक कोई औपचारिक मंजूरी नहीं दी है। इसके बाद, सचिवालय ने मंत्रालय को 15 नवंबर तक सभी जरूरी मंजूरियां पूरी करने का सख्त निर्देश दिया।

419 प्रस्तावों की तकनीकी जांच जारी

प्रोजेक्ट्स की मंजूरी में हो रही देरी को लेकर कृषि मंत्रालय ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि अनुसंधान प्राथमिकताओं की पहचान करने के बाद देश भर के वैज्ञानिक संस्थानों से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे। कुल 419 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनकी स्क्रीनिंग और तकनीकी मूल्यांकन की प्रक्रिया चल रही है। इनमें से 125 प्रस्ताव भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) संस्थानों से, 249 राज्य कृषि विश्वविद्यालयों से, 14 अन्य सरकारी विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से तथा 5 निजी विश्वविद्यालयों से प्राप्त हुए हैं।

मंत्रालय के अनुसार, शोधकर्ता इन प्रस्तावों को राष्ट्रीय स्तर की अनुसंधान और विकास समिति के समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं। इस समिति में एक अतिरिक्त सचिव, वरिष्ठ वैज्ञानिक और विषय विशेषज्ञ शामिल हैं। पिछली तीन बैठकों में कई प्रस्तावों को शॉर्टलिस्ट किया जा चुका है। इन प्रस्तावों को उनके वैज्ञानिक महत्व, किसानों को होने वाले संभावित लाभ और जमीनी स्तर पर उनकी व्यावहारिक उपयोगिता के आधार पर अंतिम मंजूरी दी जा रही है।

दालों के उत्पादन में 45 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद 11 अक्टूबर 2025 को इस राष्ट्रीय मिशन की शुरुआत की थी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में इस मिशन की रूपरेखा पेश की थी। कुल 11,440 करोड़ रुपये के इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश में दालों के उत्पादन को 45 प्रतिशत तक बढ़ाना है यानी 2023-24 के 242 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 2030-31 तक 350 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचाना है।

इसके अलावा, इस मिशन का लक्ष्य दालों की खेती का रकबा 275 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 310 लाख हेक्टेयर करना और औसत उत्पादकता को 881 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 1,130 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करना है। इस मिशन के मुख्य फोकस क्षेत्रों में जलवायु के अनुकूल बीजों का विकास, प्रोटीन की मात्रा बढ़ाना, उत्पादकता में सुधार, फसल कटाई के बाद भंडारण प्रबंधन को बेहतर बनाना और किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाना शामिल है।

खेती के रकबे और पैदावार में बढ़ोतरी

शोध परियोजनाओं को मंजूरी मिलने में हुई देरी के बीच कृषि मंत्रालय ने इस मिशन के पहले साल में उत्पादन में हुई प्रगति के आंकड़े जारी किए हैं। वर्ष 2025-26 के तीसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, देश में दालों की खेती का रकबा 3.3 प्रतिशत बढ़ा है, जो 2024-25 के 277.2 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 286.5 लाख हेक्टेयर हो गया है।

वहीं, कुल उत्पादन 256.8 लाख टन से 6.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 274.1 लाख टन तक पहुंच गया है। इसके अलावा, प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादकता में भी 3.3 प्रतिशत का सुधार हुआ है, जो 926 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 957 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है।