IEA के अनुमानों के अनुसार, 2030 तक भारत की अक्षय बिजली क्षमता लगभग 530 गीगावाट तक पहुंच सकती है, जिसमें 350 गीगावाट से अधिक क्षमता सौर ऊर्जा की होगी। हालांकि, एजेंसी ने रेखांकित किया है कि बढ़ती रिन्युवल बिजली को समायोजित करने के लिए ट्रांसमिशन ढांचे, ऊर्जा भंडारण और बिजली प्रणाली की लचीलेपन में लगातार निवेश की जरूरत है।