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कोलकाता से शुरू हुई डाक की कहानी, डिजिटल ट्रैकिंग और ई-कॉमर्स तक पहुंची

Post Office: कोलकाता से शुरू हुई भारतीय डाक की कहानी करीब तीन शताब्दियों में बदलकर डिजिटल ट्रैकिंग, ई-कॉमर्स पार्सल और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच गई है। जानिए तकनीक के दौर में कैसे बदल रहा है डाक विभाग का कामकाज।
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भारत

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Pratiksha Gupta

•

Oct 10, 2026

Indian Postal History

भारतीय डाक सेवा (फाइल फोटो)

Indian Post Office: मोबाइल और इंटरनेट के दौर में चिट्ठियों का चलन भले ही कम हो गया हो, लेकिन भारतीय डाक विभाग की भूमिका आज भी बनी हुई है। करीब तीन शताब्दियों पहले कोलकाता से शुरू हुई डाक व्यवस्था अब पार्सल, ई-कॉमर्स डिलीवरी, डिजिटल ट्रैकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच गई है। समय के साथ डाक विभाग के कामकाज में कई बदलाव आए हैं और तकनीक ने इसकी सेवाओं को नया रूप दिया है।

कोलकाता से शुरू हुआ भारतीय डाक का सफर

कभी डाकिया चिट्ठी, नौकरी का नियुक्ति पत्र, परीक्षा परिणाम और मनीऑर्डर लेकर घर की चौखट तक पहुंचता था। मोबाइल और इंटरनेट के दौर में भले ही निजी पत्रों की संख्या कम हुई हो, लेकिन डाक व्यवस्था की भूमिका खत्म नहीं हुई। करीब तीन शताब्दियों की यात्रा में भारतीय डाक विभाग ने अपने कामकाज का स्वरूप बदला है। अब चिट्ठियों के साथ पार्सल, ई-कॉमर्स की खेप, डिजिटल ट्रैकिंग और वित्तीय सेवाएं भी इसकी पहचान बन रही हैं। भारतीय डाक के इतिहास में कोलकाता की अहम भूमिका रही है। संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पहला डाकघर 1727 में कोलकाता में स्थापित हुआ था। इसके बाद 31 मार्च 1774 को कलकत्ता जनरल पोस्ट ऑफिस की शुरुआत हुई। इस तरह कोलकाता भारतीय डाक व्यवस्था के शुरुआती संस्थागत विकास का प्रमुख केंद्र बना।

एक नेटवर्क, अनंत संभावनाएं

विश्व डाक दिवस 2026 की थीम ‘एक डाक नेटवर्क, अनंत संभावनाएं’ है। यह थीम डिजिटल बदलाव के दौर में डाक नेटवर्क की व्यापक भूमिका को रेखांकित करती है। डाक विभाग आज पत्र पहुंचाने तक सीमित नहीं है। पार्सल, बचत और भुगतान से जुड़ी सेवाओं तथा विभिन्न नागरिक सेवाओं के जरिए भी यह लोगों और कारोबार को जोड़ता है। निजी कूरियर कंपनियों के विस्तार से दस्तावेज और पार्सल वितरण के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ी। डाक विभाग ने भी स्पीड पोस्ट सहित अपनी सेवाओं में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया है। ऑनलाइन बुकिंग, संदेश के जरिए सूचना, डिजिटल ट्रैकिंग और ओटीपी आधारित सुरक्षित वितरण जैसी सुविधाओं से ग्राहकों के लिए डाक सेवाओं की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हुई है।

डाकिए का काम बदला, महत्व बरकरार

करीब दो दशक से डाक व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी गिरीश राम के अनुसार, पहले कामकाज में पत्रों की छंटाई, रजिस्ट्री, मनीऑर्डर और घर-घर वितरण की प्रमुख भूमिका थी। अब मोबाइल आधारित प्रक्रियाएं, डिजिटल निगरानी और पार्सल सेवाएं भी काम का हिस्सा हैं। वरिष्ठ डाककर्मी केसरीलाल यादव का कहना है कि चिट्ठियों की दुनिया भले ही कम हुई है, लेकिन डाकिए का काम खत्म नहीं हुआ है। ई-कॉमर्स के विस्तार से पार्सल वितरण की जिम्मेदारी बढ़ी है। इस तरह बदलते समय और तकनीक के साथ डाक विभाग ने भी अपनी सेवाओं को नया रूप दिया है।