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Giorgia Meloni: इटली में बुर्का बैन पर सपा विधायक का तंज, पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी पर दिया बड़ा बयान

burqa and niqab ban: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने की घोषणा की है। इस पर सपा नेता अबू आसिम आजमी ने आपत्ति जताई है।
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PM Modi Italy Visit and Giorgia Meloni Welcome

PM Modi and Giorgia Meloni (Photo- X/@GiorgiaMeloni)

Italy Burqa Ban: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब जैसे चेहरा ढकने वाले कपड़ों पर रोक लगाने की घोषणा की थी। इस पर समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आसिम आजमी ने प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने कहा कि मेलोनी नरेंद्र मोदी की दोस्त हैं, इसलिए वह ऐसा कर रही हैं। आजमी ने कहा कि वह जब चाहें बयान दे सकती हैं, लेकिन ऐसी बातें किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने वाली हैं।

स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक की तैयारी

इटली की प्रधानमंत्री ने अपनी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के एक कार्यक्रम में यर घोषणा की थी कि इटली अब स्कूलों में चेहरा ढकने वाली चीजों जैसे- बुर्का और हिजाब पर रोक लगाएगा और हर क्लास में विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करेगा। इस घोषणा के बाद समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आसिम आजमी ने यह प्रतिक्रिया दी। साथ ही उन्होंने कहा कि वे इटली की प्रधानमंत्री है इसलिए जब चाहे ऐसा बयान दे सकती है, लेकिन उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उनकी इस बातों से किसी की आस्था को ठेस नहीं पहुंचे।

कांग्रेस ने भी दी प्रतिक्रिया

इटली में स्कूलों में बुर्के पर प्रतिबंध की घोषणा पर कांग्रेस नेता उदित राज का कहना है कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी है और उन्हें वहां की व्यवस्था के हिसाब से कानून बनाने का अधिकार है। उसके स्कूलों में कौन से प्रोटोकॉल लागू होंगे और धार्मिक प्रतीकों की अनुमति दी जाएगी या नहीं यह उनका अपना अधिकार है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होता है तो भेदभाव का सवाल ही नहीं उठता।

विदेशी छात्रों की संख्या भी तय करने की तैयारी

अपनी घोषणा में मेलोनी ने कहा कि विदेशी छात्रों के माता-पिता के लिए इतालवी भाषा सीखना जरूरी होगा। जिससे उन्हें स्कूल के सिस्टम में घुलन-मिलने में दिक्कते नहीं होगी। साथ ही सरकार हर क्लास में विदेशी छात्रों की अधिकतम संख्या कानूनी रूप से तय करने की तैयारी कर रही है। उनका मानना है कि अगर विदेशी बच्चों की संख्या इतालवी बच्चों से ज्यादा होगी तो, इतालवी बच्चों को अपनी ही क्लास में अल्पसंख्यक जैसा महसूस होगा, जो नहीं होना चाहिए।