21 सितंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, केंद्र सरकार की याचिका खारिज, कंपनी एक्ट को लेकर जारी हुआ सख्त आदेश

Supreme Court Companies Act: सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी एक्ट में निजी शिकायत पर रोक के फैसले के खिलाफ केंद्र की समीक्षा याचिका खारिज कर दी है। सेक्शन 212(6) के तहत अधिकारी को अधिकार देने का रास्ता खुला है।
2 min read
Google source verification

भारत

image

Mukul Kumar

Sep 21, 2026

Supreme Court Bar Council of India

सुप्रीम कोर्ट। (फोटो सोर्स- IANS)

Supreme Court Order: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की समीक्षा याचिका ठुकरा दी है। कंपनी एक्ट के कुछ अपराधों में निजी व्यक्ति की शिकायत पर संज्ञान लेने पर रोक के फैसले पर केंद्र ने दोबारा विचार करने की मांग की थी।

इस पर अदालत ने साफ कह दिया कि पुराने फैसले में कोई बदलाव की जरूरत नहीं। यह फैसला उन मामलों से जुड़ा है जहां गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों की जांच होती है।

किसी भी अधिकारी को यह अधिकार दे सकता है केंद्र

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र को रास्ता भी दिखाया। सेक्शन 212(6) के दूसरे प्रोविजन का इस्तेमाल करके कोई भी अधिकारी शिकायत दर्ज करवा सकता है। केंद्र सामान्य या खास आदेश से किसी भी अधिकारी को यह अधिकार दे सकता है।

क्या चाहती थी केंद्र सरकार?

केंद्र सरकार चाहती थी कि पुराना फैसले को दोबारा देखा जाए। लेकिन कोर्ट ने साफ इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि फैसला सही है और उसमें कोई खामी नहीं।

साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र चाहे तो एसएफआईओ के अलावा अन्य जांच एजेंसियों के मामलों में भी आरओसी अधिकारी को अधिकृत कर सकता है।

सुनवाई के दौरान और क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान जजों ने एसएफआईओ जांच से अलग मामलों पर भी बात की। निजी शिकायतों पर रोक लगाने वाले फैसले के बावजूद सरकार के पास विकल्प मौजूद हैं। कोई भी अधिकृत अधिकारी शिकायत दाखिल कर सकता है। इससे जांच और मुकदमे की प्रक्रिया रुकने का खतरा कम हो जाएगा।

निजी शिकायत पर रोक का मतलब

कंपनी एक्ट के कुछ अपराधों में सिर्फ सरकारी एजेंसियां या अधिकृत अधिकारी ही शिकायत कर सकते हैं। निजी व्यक्ति सीधे अदालत नहीं जा सकता। इस नियम को सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सही ठहराया था।

केंद्र की समीक्षा याचिका में इसी फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने दोहराया कि यह नियम कानून के मुताबिक है। लेकिन साथ में केंद्र को याद दिलाया कि वह किसी आरओसी अधिकारी या अन्य अधिकारी को लिखित आदेश से शिकायत दायर करने का अधिकार दे सकता है। इससे निजी शिकायतों की जगह सरकारी मशीनरी काम करेगी।