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Police Verification: कर्नाटक सरकार का नया कदम, ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए बन सकती है SOP

Migrant Workers Background Check: डिलीवरी ऐप से लेकर फैक्ट्री और होम-स्टे तक, कर्मचारियों की पहचान जांचने के लिए नई प्रक्रिया बनाई जा सकती है। आखिर सरकार को अचानक यह कदम उठाने की जरूरत क्यों महसूस हुई और कंपनियों की जिम्मेदारी क्या होगी?
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भारत

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Manoj Vashisth

•

Oct 18, 2026

Karnataka Home Minister Priyank Kharg

Karnataka Home Minister Priyank Kharg : कर्नाटक में पुलिस वेरिफिकेशन पर सख्ती की तैयारी, प्रियांक खरगे ने कंपनियों को दी सलाह (Photo-ANI)

Karnataka Home Minister Priyank Kharg: कर्नाटक में सोशल मीडिया के जरिए कथित कट्टरपंथी संगठनों के संपर्क में आने के संदेह ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य सरकार अब केवल संदिग्ध गतिविधियों की जांच तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि कंपनियों और प्रतिष्ठानों में काम करने वाले बाहरी कर्मचारियों के सत्यापन की व्यवस्था भी मजबूत करने की तैयारी में है। गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने स्पष्ट किया है कि रोजगार के अधिकार का सम्मान करते हुए सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी गंभीरता से काम किया जाएगा।

Migrant Workers Background Check: दो युवकों से पूछताछ के बाद बढ़ी सतर्कता

कलाबुरगी में कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों तथा आंतरिक सुरक्षा प्रभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए सोशल मीडिया पर कथित कट्टरपंथी तत्वों के करीब पहुंच रहे दो युवकों को सत्यापन के लिए हिरासत में लिया था। जांच में एक युवक के संपर्क की पुष्टि हुई, जबकि दूसरे के बारे में ऐसा कोई संपर्क सामने नहीं आया। दूसरे युवक के मामले में आगे की जांच जारी है।

खरगे के अनुसार, दोनों युवक मूल रूप से कर्नाटक के बाहर के रहने वाले हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो-तीन महीनों में इस तरह के पांच या छह मामले सामने आ चुके हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल से जुड़े लोगों के नाम सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, किसी व्यक्ति का दूसरे राज्य से होना अपने आप में संदेह का आधार नहीं है; जांच का केंद्र उसकी वास्तविक गतिविधियां और संपर्क हैं।

Karnataka May Introduce Verification SOP: कंपनियों को बनानी पड़ सकती है सत्यापन की मानक प्रक्रिया

गृह मंत्री ने कहा कि सरकार प्रवासी श्रमिकों की सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य पहलुओं की समीक्षा कर रही है। आगामी त्योहारों की छुट्टियों के बाद प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों, फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म, लॉजिस्टिक्स कारोबार, कॉफी उद्योग से जुड़े संगठनों और होम-स्टे संचालकों के साथ बैठक की जाएगी। इन संस्थानों से कर्मचारियों के सत्यापन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी तैयार करने को कहा जा सकता है।

सरकार यह भी देखेगी कि स्थानीय पुलिस थानों के माध्यम से पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को कम समय में पूरा करने के लिए क्या व्यवस्था बनाई जा सकती है।

SOPs for E-Commerce and Logistics Companies: डिलीवरी पार्टनर से घरेलू सहायकों तक दायरे में आएंगे कई क्षेत्र

खरगे ने बताया कि कॉफी शॉप, घरेलू कामकाज, फैक्ट्री, टेक्सटाइल मिल और ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं से जुड़े नियोक्ताओं को पहले भी सत्यापन के लिए प्रोत्साहित किया गया है। सरकार जरूरत पड़ने पर इस काम में सहायता देने को तैयार है, लेकिन संस्थानों की ओर से अपेक्षित पहल नहीं हो रही है।

उन्होंने नियोक्ताओं से अपील की कि किसी भी व्यक्ति को काम पर रखने से पहले उसकी पृष्ठभूमि की उचित जांच कराएं। उनके मुताबिक, सुरक्षा के मामले में लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

संविधान के अधिकार और सुरक्षा के बीच संतुलन पर जोर

गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि दूसरे राज्यों से आकर रोजगार तलाशना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और केवल बाहरी राज्य का निवासी होने के कारण किसी को काम करने से नहीं रोका जा सकता। सरकार की चिंता संदिग्ध गतिविधियों की जांच और संस्थागत सत्यापन को मजबूत करने से जुड़ी है।

आगे क्या बदल सकता है?

यदि प्रस्तावित एसओपी लागू होती है, तो कंपनियों को कर्मचारी की पहचान, पते और आवश्यक पृष्ठभूमि की जांच के लिए अधिक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है। इससे नियोक्ताओं की जवाबदेही बढ़ेगी, लेकिन व्यवस्था ऐसी होनी जरूरी है जिसमें निर्दोष कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी न हो और उनकी निजी जानकारी का दुरुपयोग भी न किया जाए।

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