
शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत (Photo-IANS)
Sanjay Raut Letter to Amit Shah: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े 500 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने और 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत कार्रवाई करने की मांग की है। संजय राउत ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी विधायकों, सांसदों और पार्टियों को तोड़ने के बाद अब आंदोलन भी खरीदने लगी है।
अपने पत्र में, संजय राउत ने 20 अक्टूबर 2024 को मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल द्वारा किए गए खुलासों का जिक्र किया। राउत के अनुसार, जरांगे पाटिल ने आरोप लगाया है कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले मराठा आंदोलन को दबाने और शांत करने के लिए बीजेपी की कोर टीम ने 500 करोड़ रुपये का इंतजाम किया था। यह बड़ी रकम महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके बेटे सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के जरिए जारांगे तक पहुंचाई जानी थी, लेकिन यह पैसा उन तक कभी नहीं पहुंचा।
संजय राउत ने दावा किया कि जारांगे पाटिल ने इस पूरे मामले से जुड़ी एक ऑडियो क्लिप भी सार्वजनिक की है, जो इस बात का पुख्ता सबूत है कि पर्दे के पीछे करोड़ों रुपयों का एक बड़ा और अवैध खेल रचा गया था।
केंद्रीय गृह मंत्री को लिखे पत्र में संजय राउत ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि 500 करोड़ रुपये की इतनी बड़ी रकम कहां से आई? इसके अलावा अगर यह पैसा मनोज जरांगे पाटिल तक नहीं पहुंचा, तो बीच में ही यह कहां गायब हो गया? उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से मनी लॉन्ड्रिंग का एक क्लासिक मामला बनता है।
संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र और देश की जनता के सामने सच आना चाहिए कि चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी रकम का इंतजाम किसने किया, यह लेनदेन किस स्तर पर हुआ और इस काले धन का असली फायदा किसे मिला। इसे एक वित्तीय घोटाला बताते हुए उन्होंने मांग की कि इस मामले को बिना किसी देरी के किसी जांच एजेंसी को सौंप दिया जाना चाहिए।
केंद्रीय जांच एजेंसियों पर सवाल उठाते हुए संजय राउत ने मार्च 2021 की उस हाई प्रोफाइल घटना का जिक्र किया, जिसमें मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपये की वसूली के आरोप लगाए थे। राउत ने बताया कि उस समय प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बहुत तेजी दिखाई थी और बिना किसी ठोस दस्तावेजी या ऑडियो सबूत के सिर्फ एक आरोप के आधार पर तत्कालीन गृह मंत्री को गिरफ्तार कर लिया था।
तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि मनोज जारांगे पाटिल के मामले में न केवल 500 करोड़ रुपये जितनी बड़ी रकम है, बल्कि इसमें ऑडियो क्लिप के रूप में ठोस सबूत भी मौजूद हैं। ऐसे में जांच एजेंसी को भाजपा नेताओं, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सांसद श्रीकांत शिंदे की भूमिका की जांच करने में भी उतनी ही तत्परता दिखानी चाहिए।
अपने पत्र के आखिर में, सांसद संजय राउत ने कहा कि जब तक इस भारी-भरकम रकम के स्रोत और यह कहां तक पहुंची, इसकी पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहेंगे। उन्होंने गृह मंत्री से आग्रह किया कि वे खुद इस मामले का संज्ञान लें और महाराष्ट्र पुलिस तथा प्रवर्तन निदेशालय (ED) को निर्देश दें कि वे निष्पक्ष जांच करके सच सामने लाएं।
Updated on:
26 Oct 2026, 9:39 AM IST
Published on:
26 Oct 2026, 9:39 AM IST
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