
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फोटो-X post/@EmbassyofRussia)
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से डीजल समझौता किया है, जिसको लेकर अमेरिका में सियासी घमासान मचा है। रूस से प्रतिबंध हटाने को लेकर विवाद इतना बढ़ गया है कि अब ट्रंप की पार्टी के सासंद भी उनके खिलाफ चले गए हैं।
इस बीच, डैमेज कंट्रोल करने के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रूस से प्रतिबंध हटाए जाने को लेकर मजबूत सफाई दी है। उन्होंने बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि भारत जैसे देशों को तेल संकट से बचाने के लिए रूस पर से प्रतिबंध 60 दिनों के लिए हटाए गए हैं।
रुबियो ने कहा है कि दुनिया भर में कई युद्ध एक साथ चल रहे हैं और इनका असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। इसी वजह से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को 60 दिनों के लिए रोक दिया है।
उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए यह भी बताया कि ईरान युद्ध, सऊदी अरब पर हूती हमले और यूक्रेन-रूस युद्ध, ये तीनों संघर्ष अब एक-दूसरे से टकरा रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं। ऐसे में प्रतिबंध जारी रखना और भी महंगा पड़ सकता है।
मीडिया से बातचीत के दौरान रुबियो ने भारत का नाम खास तौर पर लिया। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को अलग-अलग देशों से पूरा करने की कोशिश की है, लेकिन अभी भी रूसी तेल पर काफी निर्भर है। एक दिन में पूरा सिस्टम बदलना आसान नहीं होता।
उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपने सहयोगी देशों पर भी नजर रखनी पड़ती है। अगर प्रतिबंध सख्त किए जाते तो भारत जैसे देशों को महंगा तेल खरीदना पड़ता।
इस दौरान रुबियो ने एक और बड़ा बयान दिया। उन्होंने खुलकर कहा कि रूस अपना डीजल किसी न किसी तरीके से बेचेगा ही, वह शांत नहीं बैठने वाला है। फर्क सिर्फ इतना है कि अमेरिका को उसमें कितना हिस्सा मिलेगा। प्रतिबंध लगाने से रूस का नुकसान उतना नहीं होता जितना वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ जाती है।
Updated on:
18 Oct 2026 08:23 am
Published on:
18 Oct 2026 07:24 am
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