
मिशन 6-जी(एआई फोटो-चैटजीपीटी)
नई दिल्ली: जी-6 में पूरी दुनिया की अगुवाई करने का मकसद लेकर काम कर रहे भारत ने 2030 के लिए नई रणनीति अपना ली है। भारत 6जी को लेकर वैश्विक लीडर बनने के लिए काम कर रहा है। इसी कारण इंटरनेशनल पेटेंट कराया जा रहा है, ताकि नई तकनीक की वैश्विक स्वीकार्यता हो। देश में तीन आईआईटी सहित 90 संस्थानों की टीमों को साथ लेकर भविष्य की तकनीक पर खोज चल रही है। अभी 6जी को लेकर भारत का सबसे प्रतिस्पर्धी देश चीन है। चीन पूरी तरह अपने घरेलू नेटवर्क पर काम कर रहा है, लेकिन भारत ने चीन से बिलकुल जुदा रणनीति अपनाई है। भारत ने एक साथ तीन मोर्चो पर काम शुरू किया है। पहला, घरेलू 6जी नेटवर्क तैयार करना। दूसरा, दुनिया में 6जी पर हो रहे काम में भागीदारी रखना और तीसरा चुनिंदा देशों के साथ कॉमन नेटवर्किंग पर काम करना। बीते दिनों 24 देशों के ग्रुप में शामिल होने के पीछे भी भारत का यही मकसद रहा है।
6जी के वैश्विक मानक तय करने की प्रक्रिया में भारत की भागीदारी बढ़ रही है। सरकार के अनुसार, थर्ड जनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट (3जीपीपी) में भारतीय प्रतिभागियों की संख्या 717 से बढ़कर 1787 हो गई है। इसी अवधि में भारतीय तकनीकी योगदान 196 से बढ़कर 2943 हो गया। यह 6जी के क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों और अन्य देशों के प्रतिभागियों के साथ बढ़ते तकनीकी सहयोग को दर्शाता है।
6जी की अगली पीढ़ी की उच्च गति वाली वायरलेस तकनीक विकसित करने के लिए भारत टेराहर्ट्ज टेस्टबेड तैयार कर रहा है। इस परियोजना में आइआइटी मद्रास, आइआइटी गुवाहाटी और आइआइटी पटना मिलकर काम कर रहे हैं। इसके तहत 270 गीगाहर्ट्ज वायरलेस लिंक पर 6400 मेगाबाइट प्रति सेकंड की उच्च डेटा दर वाली लाइन-ऑफ-साइट लिंक का प्रदर्शन किया जा चुका है।
भारत की 6जी रणनीति में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी अहम है। सितंबर में 24 देशों की 6जी नेतृत्व और सुरक्षा पहल में भारत के साथ अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और अन्य देश शामिल हुए। इससे भारत का अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ा है। साथ ही, 6जी के क्षेत्र में अपने प्रमुख प्रतिस्पर्धी चीन से अलग राह अपनाने की रणनीति भी सामने आई है।
Updated on:
21 Sept 2026 08:26 pm
Published on:
21 Sept 2026 07:39 pm
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