2007 में जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान मिलन प्रधान के खिलाफ नंदीग्राम और खेजुरी पुलिस स्टेशनों में हत्या, हत्या की कोशिश, हथियारों के साथ दंगा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप दर्ज किए गए थे। पुलिस के अनुसार, इन मामलों में उनके खिलाफ वारंट लंबे समय से लंबित थे। यह कार्रवाई लंबित वारंटों के निष्पादन के संबंध में चुनाव आयोग के स्थायी निर्देशों के अनुसार की गई।