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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची नई याचिका, चुनाव आयोग के फैसलों की जांच की मांग

Gyanesh Kumar Supreme Court New Plea: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल की गई है। इसमें ECI के कामकाज, जुलाई 2026 में Form-6 में बदलाव और SIR से जुड़े फैसलों की न्यायिक या SIT जांच की मांग की गई है।
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भारत

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Harshul Mehra

•

Sep 28, 2026

gyanesh kumar

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Photo: IANS)

Gyanesh Kumar Supreme Court New Plea: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC)ज्ञानेश कुमार के खिलाफसुप्रीम कोर्टमें एक और याचिका दाखिल की गई है। याचिका में भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज और उसके रिकॉर्ड की न्यायिक जांच या विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की गई है।

याचिका में ECI की कार्यप्रणाली पर सवाल

राकेश कुमार सिंह उर्फ राकेश सिंह की ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई सदस्यों वाली संस्था के तौर पर पोल पैनल को मिली शक्तियों का इस्तेमाल, संविधान के आर्टिकल 324 और 2023 एक्ट के सेक्शन 18 के तहत तय सामूहिक फैसले लेने की प्रक्रिया का पालन किए बिना किया गया। याचिका में दावा किया गया है कि आयोग के कामकाज में सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था का पालन किया जाना जरूरी है।

जुलाई 2026 में Form-6 में बदलाव का मुद्दा

याचिका में जुलाई 2026 में Form-6 में किए गए बदलाव को भी चुनौती दी गई है। Form-6 नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। याचिका में आरोप है कि ऑनलाइन Form-6 में बदलाव करते समय निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

न्यायिक आयोग या SIT से जांच की मांग

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि यदि निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड की जांच में बिना अधिकृत प्रक्रिया के फैसले लिए जाने की बात सामने आती है, तो पूरे मामले की जांच न्यायिक आयोग या विशेष जांच दल से कराई जाए। याचिका में संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का निर्देश देने की भी मांग की गई है, जिससे बाद में जांच के दौरान आवश्यक दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रह सकें।

Form-6 में आगे बदलाव पर रोक की मांग

याचिका में Form-6 में किसी भी बड़े बदलाव पर रोक लगाने की मांग भी की गई है। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने मुख्य चुनाव आयुक्त को मामले के लंबित रहने तक संबंधित कार्रवाई से रोकने का निर्देश देने की मांग की है।

SIR की कार्रवाइयों को शून्य घोषित करने की मांग

याचिका में Special Intensive Revision (SIR) से जुड़ी कार्रवाइयों को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि SIR के तहत लिए गए सभी फैसलों, निर्देशों और उनसे जुड़े उपायों को शुरू से ही शून्य और कानूनी अधिकार के बिना किया गया कार्य घोषित किया जाए। याचिका में दावा किया गया है कि यदि आयोग के स्तर पर निर्धारित सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है, तो उससे जुड़े फैसलों की वैधानिकता की न्यायिक समीक्षा जरूरी है।

बहुमत से फैसले के प्रावधान का हवाला

याचिका में 2023 के कानून की धारा 18 का हवाला देते हुए कहा गया है कि निर्वाचन आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है और उसके कामकाज में सामूहिक निर्णय प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जहां मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की राय अलग-अलग हो, वहां कानून में बहुमत की राय के आधार पर फैसला किए जाने की व्यवस्था है। इसी आधार पर याचिका में आयोग के कुछ फैसलों और प्रशासनिक कार्रवाइयों के रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।

ECI के फैसलों को लेकर पहले भी उठे सवाल

CEC ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में ECI की कार्यप्रणाली को लेकर हाल के दिनों में कई कानूनी और राजनीतिक सवाल उठे हैं। एक अन्य याचिका में भी जुलाई 2026 में Form-6 में बदलाव और आयोग के फैसलों में सामूहिक प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए गए थे।