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भारत में पलायन की मजबूरी क्यों? नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष का बिहार-झारखंड की स्थिति को लेकर बड़ा बयान

Indian Economy: नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बेरोजगारी को भारत की सबसे बड़ी चुनौती बताया है। उन्होंने उज्जैन के पश्चिम और पूर्व के राज्यों में रोजगार के अंतर को समझाते हुए गोवा और बिहार की प्रति व्यक्ति आय की तुलना की।
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NITI Aayog Former Vice Chairman Rajiv Kumar

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार (फोटो-IANS)

India Jobs Crisis: भारत में तिमाही पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के आधिकारिक आंकड़े जारी होने के बाद नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और आर्थशास्त्री राजीव कुमार ने भारत में रोजगार की स्थिति को लेकर बड़ी जानकारी दी है। उनके मुताबिक भारत में रोजगार का सृजन करना एक बहुत बड़ी चुनौती है। सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, 18 से 25 साल के युवाओं में बेरोजगारी दर करीब 17 फीसदी है। वहीं, कुछ राज्यों में यह आंकड़ा और भी ज्यादा है। राज्यों में रोजगार के अवसर और उनकी चुनौतियों के बारे में बात करते हुए उन्होंने बतााया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में रोजगार और कमाई के अवसरों में कितना अंतर है।

उज्जैन के पश्चिम में ज्यादा मौके

राजीव कुमार ने कहा कि पूरे भारत की अर्थव्यवस्था को एक जैसा समझना सही नहीं है। इसके लिए उन्होंने उज्जैन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उज्जैन के पश्चिमी हिस्से में आर्थिक विकास की रफ्तार, रोजगार के अवसर और लोगों का जीवन स्तर पूर्वी हिस्से के मुकाबले बेहतर है। वहीं, पूर्वी हिस्से में काम की तलाश करने वाले लोग ज्यादा हैं और ये लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं।

गोवा की कमाई बिहार से 10 गुना ज्यादा

राज्यों में प्रति व्यक्ति आय का अंतर समझाने के लिए राजीव कुमार ने बिहार और गोवा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि गोवा की प्रति व्यक्ति आय बिहार के मुकाबले करीब 10 गुना है। ऐसे में देश की आर्थिक स्थिति को केवल राष्ट्रीय आंकड़ों से समझने के बजाय हर राज्य की स्थिति अलग-अलग देखनी चाहिए।

ऐसे में उनके मुताबिक, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सरकार की नीतियों के जरिए इन राज्यों को ज्यादा संसाधन मिलने चाहिए। उन्होंने युवाओं को रोजगार के लायक हुनर सिखाने को भी बड़ी चुनौती बताया।

सरकारी आंकड़ों में क्या सामने आया?

सितंबर 2026 की PLFS रिपोर्ट के मुताबिक, 15 साल से अधिक उम्र के 55.5 फीसदी लोग लेबर फोर्स का हिस्सा बने, जो पिछले साल के मुकाबले थोड़ी बढ़त दर्शाता है। इसके साथ ही शहरों में भी शहरों में भी रोजगार और काम की मांग बढ़ी है। अगस्त 2026 के मुकाबले सितंबर 2026 में शहरी भागीदारी बढ़कर 50.7 फीसदी हो गई है। इसके अलावा महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 34.6 फीसदी पहुंच गई।