
पंडित दीनदयाल उपाध्याय। फोटो सोर्स- X (@BJPMM4ASSAM1)
Pandit Deendayal Upadhyaya Birth Anniversary: 25 सितंबर को देशभर में पंडित दीनदयाल उपाध्यायकी जयंती मनाई जाती है। वह भारतीय जनसंघ के सह-संस्थापक थे। वह 1953 से 1968 तक भारतीय जनसंघ के नेता रहे। भारतीय राजनीति में उनका नाम खास तौर पर BJP की विचारधारा और संगठनात्मक इतिहास से जुड़ा हुआ है। उनकी जयंती के दिनभारतीय जनता पार्टी के नेता शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए इकट्ठा हुए। आपको बताते हैं उनके जीवन से जुड़े चर्चित किस्से।
दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को मथुरा के नगला चंद्रभान गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम भगवती प्रसाद उपाध्याय और मां का नाम रामप्यारी था। बताया जाता है कि उनकी मां धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। दीनदयाल का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। जब वह महज 3 साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। इसके करीब 4 साल बाद उनकी मां भी नहीं रहीं। इस तरह 7 वर्ष की उम्र में ही दीनदयाल ने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया। इसके बाद उनका पालन-पोषण ननिहाल में हुआ।
उन्होंने आगे की शिक्षा पिलानी, आगरा और प्रयाग में हासिल की। उन्होंने BSC और बीटी की पढ़ाई की, लेकिन पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी का रास्ता नहीं चुना। छात्र जीवन से ही उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हो गया था। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह संघ के प्रचारक बन गए। उनके सरल और सहज व्यवहार ने लोगों के बीच उनकी अलग पहचान बनाई।
दीनदयाल उपाध्याय के अविवाहित रहने को लेकर एक कहानी अक्सर सुनाई जाती है। इस किस्से के मुताबिक, बचपन में उनके नाना चुन्नीलाल शुक्ल उनके भविष्य को लेकर उत्सुक हुए। उन्होंने दीनदयाल की जन्मकुंडली दिखाने के लिए एक प्रसिद्ध ज्योतिषी को बुलाया। ज्योतिषी ने कुंडली देखने के बाद दीनदयाल के बारे में कई बातें बताईं। उसने कहा कि बालक काफी प्रतिभाशाली है और भविष्य में बहुत आगे जाएगा। उसके व्यक्तित्व में सेवा, दया और मानवता जैसे गुण दिखाई देंगे। ज्योतिषी ने यह भी कहा कि वह आगे चलकर युग पुरुष के रूप में पहचान बनाएगा और उसे देश-विदेश में सम्मान मिलेगा।
लेकिन ज्योतिषी की बात यहीं खत्म नहीं हुई। उसने आगे बताया कि दीनदयाल विवाह नहीं करेंगे। यह सुनकर उनके नाना चिंतित हो गए। हालांकि उन्होंने उस समय खुद को यह कहकर समझाया कि उम्र बढ़ने के बाद वह दीनदयाल को विवाह के लिए राजी कर लेंगे। बाद की जिंदगी में ऐसा नहीं हुआ। दीनदयाल उपाध्याय ने विवाह नहीं किया।
दीनदयाल उपाध्याय की ईमानदारी से जुड़ा एक प्रसंग भी काफी चर्चित है। बताया जाता है कि एक बार वह ट्रेन से सफर कर रहे थे। उसी ट्रेन में गुरु गोलवलकर भी मौजूद थे। जब उन्हें पता चला कि दीनदयाल भी उसी ट्रेन में यात्रा कर रहे हैं, तो उन्हें अपने पास बुला लिया गया।
दीनदयाल उनके पास पहुंचे और करीब 1 घंटे तक सेकेंड क्लास के डिब्बे में उनके साथ बातचीत करते रहे। इसके बाद वह वापस अपने थर्ड क्लास वाले डिब्बे में चले गए। वापसी के दौरान उन्होंने TTE से संपर्क किया और बताया कि वह लगभग 1 घंटे तक सेकेंड क्लास के डिब्बे में बैठे रहे, जबकि उनके पास थर्ड क्लास का टिकट था। उन्होंने नियम के अनुसार उस अतिरिक्त यात्रा का किराया देने की बात कही। TTE ने पहले इसे छोड़ देने के लिए कहा, लेकिन दीनदयाल अपनी बात पर कायम रहे। जब वह नहीं माने तो TTE ने उनसे 2 घंटे का किराया वसूल किया।
दीनदयाल उपाध्याय की जिंदगी का आखिरी अध्याय भी रहस्य से जुड़ा रहा। 11 फरवरी 1968 की रात रेल यात्रा के दौरान मुगलसराय स्टेशन के वार्ड में उनका शव मिला था। उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर बाद में जांच हुई, लेकिन इस घटना से जुड़े सवाल पूरी तरह साफ नहीं हो सके। उनकी मौत के पीछे हत्या की आशंका जताए जाने की बात भी सामने आती रही। परिवार की ओर से भी हत्या की आशंका व्यक्त की गई थी। केंद्र सरकार से मामले की जांच कराने की मांग की गई और जांच से संतुष्ट नहीं होने पर नाराजगी भी जताई गई। हालांकि इस मामले में साजिश से जुड़े सवालों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका।
Updated on:
25 Sept 2026 12:17 pm
Published on:
25 Sept 2026 12:17 pm
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