
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव (Photo- pappu yadav FB)
Pappu Yadav on Reservation: बिहार की राजनीति में NDA के दो अहम सहयोगी चिराग पासवान और जीतन राम मांझी आरक्षण में उप-वर्गीकरण के मुद्दे पर आमने-सामने हैं। इसी बीच, पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का बड़ा बयान सामने आया है। कटिहार पहुंचे सांसद पप्पू यादव ने आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था पर बात करते हुए मांग रखी कि जिस तरह आबादी के अनुपात में सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण दिया गया, उसी तर्ज पर अति पिछड़ा (EBC), अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण कोटा बढ़ाकर 58 प्रतिशत किया जाना चाहिए।
आरक्षण के फॉर्मूले पर सांसद पप्पू यादव ने कहा कि उच्च जातियों के गरीबों (EWS) को उनकी आबादी और हिस्सेदारी के आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो उच्च जातियों को अतिरिक्त 2 प्रतिशत आरक्षण देने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि जब सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता है, तो EBC, SC, ST और OBC समुदायों के लिए आरक्षण को 58 प्रतिशत तक क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा है।
आरक्षण के फायदों पर पप्पू यादव ने कहा कि उनके परिवार को इसकी कोई जरूरत नहीं है और उनका जमीर उन्हें इसका लाभ उठाने की इजाजत नहीं देता है। उन्होंने कहा कि न तो वे खुद, न उनका बेटा और न ही उनकी बेटी अपनी जिंदगी में कभी आरक्षण मांगेंगे, बल्कि उनके बच्चों को तो आरक्षण की बारीकियों का पता भी नहीं है।
पप्पू यादव ने आगे कहा कि आरक्षण का मुद्दा किसी खास व्यक्ति के बारे में नहीं है, बल्कि संविधान और बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के आदर्शों से जुड़ा है। कोई भी व्यक्ति समाज और संविधान से बड़ा नहीं हो सकता, इसलिए सिर्फ अपना राजनीतिक करियर बनाए रखने या सत्ता में बने रहने के लिए बाबासाहेब के आदर्शों पर हमला करना पूरी तरह गलत है।
बीजेपी और केंद्र सरकार की नीतियों पर निशाना साधते हुए पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि हाल में हुए विवादों और विरोध प्रदर्शनों से जनता का ध्यान हटाने के लिए सोची-समझी रणनीति के तहत अचानक आरक्षण और UGC जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि दो समूहों के बीच जानबूझकर विवाद पैदा करना लंबे समय से बीजेपी की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा रहा है।
पप्पू यादव ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों और चंदा चोरी जैसे गंभीर सवालों को दबाने के लिए ही इस तरह के संवेदनशील मुद्दों को उछालकर समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
Updated on:
31 Aug 2026 09:28 pm
Published on:
31 Aug 2026 09:28 pm
