17 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सम्राट और तेजस्वी की पढ़ाई पर बरसे PK, बोले- जाति नहीं कर्म पर तय करें, सातवीं फेल चाहिए, नौवीं फेल या प्रशांत किशोर

Bihar caste politics: जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर ने बिहार में जाति आधारित राजनीति पर सवाल उठाते हुए शिक्षा, रोजगार और विकास को प्रमुख मुद्दा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनता का एक वोट सरकार और व्यवस्था को जवाबदेह बनाने का संदेश दे सकता है।
2 min read
Google source verification

पटना

•

image

Anand Shekhar

•

Oct 17, 2026

Prashant Kishor SIR statement

जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर (फोटो-IANS)

Prashant Kishor: जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर से विधायक प्रशांत किशोर ने बिहार के मतदाताओं से अपील की कि वे जाति-धर्म के नैरेटिव और मुफ्त में मिलने वाले 5 किलो अनाज के लालच से ऊपर उठें। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के भविष्य, शिक्षा, कर्म, संस्कार और चरित्र के आधार पर वोट दें। इसके साथ ही उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की शैक्षणिक योग्यता पर तंज कसते हुए मतदाताओं को खुद अपना नेतृत्व तय करने की बात कही।

35 साल के शासन के बाद OBC के सिर्फ 9% बच्चे 12वीं पास - प्रशांत किशोर

लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल का जिक्र करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि पिछले साढ़े तीन दशकों से राज्य की राजनीति लगभग पूरी तरह से अगड़े बनाम पिछड़े समुदायों की जाति आधारित बहस के इर्द-गिर्द घूमती रही है। उन्होंने बताया कि पिछले 75 वर्षों में लगभग हर जाति के व्यक्ति मुख्यमंत्री बने हैं, लेकिन किसी भी नेता ने वास्तव में अपने ही समुदाय का उत्थान नहीं किया है।

सरकार की जाति आधारित जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि 30-35 वर्षों के शासन के बाद भी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के युवाओं में से केवल 9 प्रतिशत ही 12वीं कक्षा तक की शिक्षा पूरी कर पाए हैं। अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए यह आंकड़ा 7 प्रतिशत से भी कम है, जबकि दलित और मुस्लिम समुदायों में 12वीं कक्षा तक पहुंचने वाले बच्चों की संख्या 5 प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बच्चे अपनी बुनियादी स्कूली शिक्षा भी पूरी नहीं कर पाते, तो समाज वास्तव में आरक्षण का लाभ कैसे उठा सकता है?

जनता तय करें, कैसा नेतृत्व चाहिए - प्रशांत किशोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर वोट देने के चलन पर प्रशांत किशोर ने कहा कि लोग अक्सर स्थानीय उम्मीदवारों के कामकाज को नजरअंदाज कर देते हैं और यह मान लेते हैं कि वे शीर्ष नेतृत्व को ध्यान में रखकर वोट दे रहे हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि वे सोचें कि अपने एक वोट से वे किस तरह के नेतृत्व को मजबूत कर रहे हैं।

प्रशांत किशोर ने कहा कि एनडीए और भाजपा को वोट देने पर सातवीं फेल सम्राट चौधरी का हाथ मजबूत होता है, वहीं राजद को वोट देने से नौवीं फेल तेजस्वी यादव को ताकत मिलती है। उन्होंने मतदाताओं से कहा कि जाति के बंधन तोड़कर तय करें कि उन्हें सातवीं फेल चाहिए, नौवीं फेल चाहिए या फिर प्रशांत किशोर जैसा पढ़ा-लिखा विकल्प चाहिए।

एक वोट से भले ही सरकार न गिरे, लेकिन सत्ता में बैठे लोगों के मन में डर पैदा कर देगा- प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर ने कहा कि जनता के पास मौजूदा व्यवस्था और सरकार को जवाबदेह ठहराने के कई मौके होते हैं। उन्होंने कहा कि भले ही जन सुराज के किसी उम्मीदवार की जीत से सरकार न गिरे, लेकिन यह सत्ता के गलियारों में एक साफ और दमदार संदेश जरूर भेजेगी कि जो लोग नेताओं को सत्ता के पदों पर बिठाने की ताकत रखते हैं, उनके पास उन्हें हटाने की भी पूरी शक्ति है। उन्होंने आगे कहा कि अगर बीजेपी और जदयू उन निर्वाचन क्षेत्रों में हार जाती हैं, जहां वे पिछले दो-तीन दशकों से अजेय रही हैं, तो ऐसी हार का असर पटना से लेकर दिल्ली तक महसूस किया जाएगा।