
सांसद कुणाल घोष (फोटो- ANI)
Kunal Ghosh: दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर TMC नेता कुणाल घोष ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश की नई पीढ़ी यानी जेन Z द्वारा उठाए गए लोकतांत्रिक मुद्दों से निपटने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों की बड़ी टुकड़ी तैनात की गई है। सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि अगर केंद्र ने हिंसा प्रभावित मणिपुर में सही समय पर इतनी ही सुरक्षा तैनात की होती, तो वहां का संकट बहुत पहले ही सुलझ गया होता।
कुणाल घोष ने पड़ोसी देशों में हुई राजनीतिक उथल-पुथल का जिक्र करते हुए कहा कि देश को नेपाल और श्रीलंका में हुए जन विद्रोहों के बारे में अच्छी तरह पता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि TMC किसी भी तरह की अराजकता या अव्यवस्था का समर्थन नहीं करती है।
उन्होंने कहा कि जब भी कोई नई पीढ़ी महत्वपूर्ण सामाजिक, शैक्षिक या राजनीतिक मुद्दों पर अपनी आवाज उठाती है या सवाल पूछती है, तो एक लोकतांत्रिक सरकार का यह कर्तव्य है कि वह उनसे बातचीत करे और उनकी चिंताओं का समाधान करे। बातचीत और तर्क के जरिए समाधान खोजने के बजाय सुरक्षा बलों का इस्तेमाल करके युवाओं की आवाज को दबाना, पूरी तरह से अलोकतांत्रिक तरीका है।
कुणाल घोष ने पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के पास इतनी बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल मौजूद हैं, तो उनका इस्तेमाल मणिपुर जैसे संकट को सुलझाने के लिए भी किया जाना चाहिए था। इसके बजाय, सरकार इन बलों को नई पीढ़ी के विरोध-प्रदर्शनों के खिलाफ तैनात कर रही है, जबकि युवाओं के सवालों का जवाब देना ज्यादा जरूरी है।
कुणाल घोष ने कहा कि मणिपुर महीनों से जातीय हिंसा और भारी अशांति से जूझ रहा है, जहां इस तरह के सुरक्षा उपायों की सख्त जरूरत थी। अगर केंद्र सरकार ने गंभीरता और तत्परता दिखाते हुए सही समय पर मणिपुर के संवेदनशील इलाकों में इन अर्धसैनिक बलों को तैनात किया होता, तो राज्य अब तक शांति के रास्ते पर लौट आया होता और शायद इसकी समस्याओं का कोई स्थायी समाधान भी मिल गया होता।
कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि देश के युवाओं की दुर्दशा, बेरोजगारी और परीक्षा प्रणाली की खामियों को लेकर केंद्र सरकार के पास कोई ठोस जवाब नहीं है। अपनी ही नीतियों के नतीजों और प्रशासनिक विफलताओं से घिरी सरकार सीधे सवालों का सामना करने के बजाय छात्रों के खिलाफ पुलिस और अर्धसैनिक बलों का इस्तेमाल कर रही है।
कुणाल घोष ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों के जरिए डरा-धमकाकर नई पीढ़ी की वैचारिक अभिव्यक्ति और उनके अधिकारों को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह बल प्रयोग का रास्ता छोड़े और इसके बजाय युवाओं के साथ सीधे बातचीत करे।
Updated on:
17 Oct 2026 09:51 am
Published on:
17 Oct 2026 09:50 am
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