
संजय निरुपम। फोटो-IANS
Sanjay Nirupam on Rahul Gandhi: शिवसेना प्रवक्तासंजय निरुपम ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेता विरोध-प्रदर्शनों के जरिए देश में अव्यवस्था बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। निरुपम ने राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों को उनका कथित फर्जी नैरेटिव बताते हुए चुनाव आयोग की आलोचना पर सवाल उठाए। साथ ही, उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई, मेट्रो स्टेशन बंद करने और कुछ ट्रेनों को अस्थायी रूप से रद्द करने के फैसले का बचाव किया। निरुपम के मुताबिक, इन कदमों का उद्देश्य राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना था, न कि देश में आपातकाल जैसी स्थिति पैदा करना। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करना उचित नहीं है।
संजय निरुपम ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी वोट चोरी के मुद्दे पर कथित तौर पर गलत नैरेटिव चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसी संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रिया को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। निरुपम के अनुसार, दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के जरिए मीडिया का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा दो बार हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने पहुंचे। राष्ट्रपति ने उन्हें मुलाकात के लिए समय दिया, जिसे निरुपम ने उनकी उदारता बताया।
हालांकि, निरुपम ने राहुल गांधी के उस कथित दावे पर भी सवाल उठाए, जिसमें राष्ट्रपति को वोट चोरी के आरोपों से सहमत बताया गया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है। किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक दलीलों को सही साबित करने के लिए करना उचित नहीं है।
अरविंद केजरीवाल के विरोध-प्रदर्शन को लेकर संजय निरुपम ने कहा कि उन्हें आम आदमी पार्टी के संयोजक के रुख से कोई आश्चर्य नहीं है। उन्होंने केजरीवाल के पुराने भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय किए गए वादों और बाद की राजनीतिक गतिविधियों में अंतर रहा है।
संजय निरुपम ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। कोई भी व्यक्ति सरकार की नीतियों से असहमत हो सकता है और अपनी बात रख सकता है। हालांकि, उनके अनुसार, इस अधिकार का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने नीट के मुद्दे पर हुए प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि जंतर-मंतर और आसपास के महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों के निकट विरोध-प्रदर्शन के दौरान अव्यवस्था, मारपीट और तोड़फोड़ हुई थी।
निरुपम के मुताबिक, ऐसी घटनाओं को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने संवेदनशील क्षेत्रों में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती बरती। उन्होंने प्रदर्शन से जुड़े नेताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई को भी इसी संदर्भ में उचित ठहराया।
दिल्ली में कई मेट्रो स्टेशन अस्थायी रूप से बंद किए जाने के फैसले पर संजय निरुपम ने कहा कि मेट्रो आम लोगों की सुविधा के लिए है। लेकिन किसी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का इस्तेमाल अव्यवस्था फैलाने के लिए नहीं होना चाहिए।
उन्होंने दिल्ली की ओर आने वाली कुछ ट्रेनों को अस्थायी रूप से रद्द करने के फैसले को भी एहतियाती कदम बताया। निरुपम के अनुसार, विभिन्न राज्यों से दिल्ली पहुंचने की तैयारी कर रहे प्रदर्शनकारियों के कारण संभावित अव्यवस्था को रोकने और राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ये कदम उठाए गए थे।
उन्होंने कहा कि संवेदनशील इलाकों में प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्था का उद्देश्य शांति बनाए रखना था। उनके मुताबिक, सार्वजनिक परिवहन से जुड़े फैसलों को इसी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
संजय निरुपम ने दिल्ली में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई की तुलना आपातकाल से किए जाने को खारिज किया। उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए अस्थायी व्यवस्थाएं करना और कानून-व्यवस्था से जुड़े कदम उठाना आपातकाल लगाने के समान नहीं है।
निरुपम के अनुसार, लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने चाहिए। इससे आम लोगों की सुरक्षा, सार्वजनिक परिवहन और कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए।उन्होंने राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार के विरोध और अव्यवस्था फैलाने के बीच अंतर समझना जरूरी है।
Updated on:
10 Oct 2026 05:05 pm
Published on:
10 Oct 2026 04:59 pm
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