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Student Union Elections:कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की प्रोटेस्ट पॉलिटिक्स से देश के हालात बदलें या न बदलें, लेकिन ABVP और NSUI जैसे छात्र संगठनों के लिए माहौल जरूर बदल रहा है। देशभर के कई विश्वविद्यालयों में सालों से रुके हुएछात्र संघचुनाव अब फिर से शुरू होते दिख रहे हैं। जहां कर्नाटक ने छात्र संघ चुनावों को मंजूरी मिल गई है। वहीं मध्य प्रदेश में हाई कोर्ट ने इस साल की शुरुआत में छात्र संघ चुनाव कराए कराने का आदेश दिया था। इसी तरह, महाराष्ट्र सरकार ने छात्र संघ चुनाव की रूपरेखा तैयार करने के लिए मुंबई विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सुहास पेडनेकर की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय समिति का गठन किया है। ओडिशा सरकार छात्र संघ चुनावों को फिर से शुरू करने के लिए संबंधित पक्षों से बातचीत कर रही है। वहीं उड़ीसा में भी छात्र संगठन राज्य सरकार से इस बावत बात कर रहे हैं।
अगले साल विधानसभा चुनाव से गुजरने वाले यूपी में भी छात्र संघ चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) छात्र संघ चुनाव फिर से शुरू करने की मांग को लेकर आला अधिकारियों से मुलाकात कर रहा है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) को 1996, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) और इलाहाबाद विश्वविद्यालय को 2018 से छात्र संघ चुनाव का इंतजार है। उत्तर प्रदेश में हिंसा की वजह से 2018 से राज्य की यूनिवर्सिटीज़ में स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन पर रोक लगी हुई है। मेरठ के चौधरी चरण सिंह वि मश्वविद्यालय में 2017 के बाद चुनाव नहीं हुए, तो दीन दयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी, गोरखपुर और लखनऊ विश्वविद्यालय में 2016 और 2012 के बाद चुनाव नहीं हुए। इसी तरह गुजरात की यूनिवर्सिटीज में भी 2023 के बाद चुनाव नहीं हुए। जामिया मिलिया इस्लामिया में 2006 से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। सेंट्रल यूनिवर्स्टी ऑफ हिमाचल प्रदेश में 2019 के बाद छात्र संघ चुनाव नहीं हुए, वहीं लद्दाख यूनिवर्सिटी में भी 2024 के बाद स्टूडेंट इलेक्शन नहीं हुए। बिहार, गुजरात, कोलकाता के कॉलेजों में भी काफी समय से छात्र संघ चुनाव नहीं हो पाए हैं। कोलकाता की जाधवपुर यूनिवर्सिटी में 2020 के बाद इलेक्शन नहीं हुए हैं। बिहार में पटना विश्वविद्यालय को छोड़ दे तो बाकी यूनिवर्सिटीज में 2018 के बाद से चुनाव नहीं हुए हैं।
| राज्य/शहर | विश्वविद्यालय | आखिरी छात्र संघ चुनाव | चुनाव की स्थिति |
|---|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) | 1996 | लंबे समय से चुनाव नहीं हुए |
| उत्तर प्रदेश | अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) | 2018 | 2018 से चुनाव नहीं हुए |
| उत्तर प्रदेश | इलाहाबाद विश्वविद्यालय | 2018 | 2018 से चुनाव नहीं हुए |
| उत्तर प्रदेश | चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ | 2017 | 2017 के बाद चुनाव नहीं हुए |
| उत्तर प्रदेश | दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर | 2016 | 2016 के बाद चुनाव नहीं हुए |
| उत्तर प्रदेश | लखनऊ विश्वविद्यालय | 2012 | 2012 के बाद चुनाव नहीं हुए |
| गुजरात | विभिन्न विश्वविद्यालय | 2023 | 2023 के बाद चुनाव नहीं हुए |
| दिल्ली | जामिया मिलिया इस्लामिया | 2006 | 2006 से चुनाव नहीं हुए |
| हिमाचल प्रदेश | सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हिमाचल प्रदेश | 2019 | 2019 के बाद चुनाव नहीं हुए |
| लद्दाख | लद्दाख यूनिवर्सिटी | 2024 | 2024 के बाद चुनाव नहीं हुए |
| पश्चिम बंगाल | जाधवपुर यूनिवर्सिटी, कोलकाता | 2020 | 2020 के बाद चुनाव नहीं हुए |
| बिहार | पटना विश्वविद्यालय | — | छात्र संघ चुनाव होते रहे हैं |
| बिहार | अन्य विश्वविद्यालय | 2018 | 2018 के बाद चुनाव नहीं हुए |
| विश्वविद्यालय | स्थिति |
|---|---|
| जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) | नियमित छात्र संघ चुनाव |
| दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) | नियमित छात्र संघ चुनाव |
| असम विश्वविद्यालय | नियमित छात्र संघ चुनाव |
| हैदराबाद विश्वविद्यालय (UoH) | नियमित छात्र संघ चुनाव |
| केरल विश्वविद्यालय | नियमित छात्र संघ चुनाव |
| पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ | नियमित छात्र संघ चुनाव |
| हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय | नियमित छात्र संघ चुनाव |
जबकि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), असम विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय (UoH), केरल विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ की पंजाब विश्वविद्यालय और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में अभी भी छात्र संघ के नियमित चुनाव होते हैं।
छात्र संघ चुनाव पर रोक की एक बड़ी वजह हिंसा रही है। 2006 में मध्य प्रदेश के एक मामले ने पूरे देश में छात्रसंघ चुनाव को लेकर बहस छेड़ दी थी। उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय के माधव कॉलेज में छात्रसंघ के चुनाव होने वाले थे, लेकिन कांग्रेस समर्थित भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) द्वारा लगाए गए कथित धांधली के आरोप के बाद कॉलेज प्रबंधन ने चुनाव रद्द करने का निर्णय लिया।
इससे एबीवीपी समर्थक नाराज़ हो गए और उन्होंने शिक्षकों के साथ मारपीट शुरू कर दी जिससे राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर की मौत हो गई. इस घटना के बाद राज्य में लंबे समय तक चुनाव बंद रहे। 2017 में इन्हें आंशिक रूप से बहाल किया गया, लेकिन जल्द ही फिर रोक लगा दी गई। दूसरे कई राज्यों में भी हिंसा को ध्यान में रखते हुए इसी तरह के फैसले लिए गए।
हाल के दिनों में यूनिवर्सिटी, कॉलेज में हिंसा की कई खबरें सामने आई हैं। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी, सीहोर की वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया है। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की तरह VIT में भी बड़ा और उग्र प्रदर्शन हुआ था।
ऐसे में राज्य सरकारों को कहीं न कहीं लगने लगा है कि स्टूडेंट यूनियन के अस्तित्व में होने से इस तरह के हिंसक प्रदर्शन को रोकने में मदद मिल सकती है। छात्र यूनियन से शिकायत कर सकते हैं और यूनियन यूनिवर्सिटी प्रशासन तक उन्हें पहुंचा सकती है। इस तरह आपसी संवाद से मामले सुलझाए जा सकते हैं।
हालांकि, बात केवल इतनी भर नहीं है, CJP के समर्थन में जुटती युवाओं की फौज ने भी राज्य सरकारों को छात्रसंघ चुनाव को हरी झंडी दिखाने को मजबूर किया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए विरोध-प्रदर्शन से यह सोच ज़ोर पकड़ रही है कि अगर चुने हुए छात्र संगठन युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में लगा सकते हैं। इसलिए कई राज्यों में इन चुनावों को मंजूरी मिल गई और कुछ इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ABVP और NSUI जैसे छात्र संगठनों के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि उनकी राजनीति इन चुनावों पर ही टिकी है।
Updated on:
07 Oct 2026 02:41 pm
Published on:
07 Oct 2026 02:27 pm
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