12 अक्टूबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

दिल्ली प्रदर्शन में वकीलों से मारपीट और हिरासत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, मंगलवार को होगी सुनवाई

दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान वकीलों के साथ मारपीट और उन्हें हिरासत में लेने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और एक अन्य वकील ने इस संबंध में याचिकाएं दायर की हैं।
3 min read
Google source verification

भारत

•

image

kamlesh sharma

•

Oct 12, 2026

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो- पत्रिका)

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान वकीलों के साथ मारपीट और उन्हें हिरासत में लेने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और एक अन्य वकील ने इस संबंध में याचिकाएं दायर की हैं। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दोनों मामलों पर मंगलवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई है।

सोमवार सुबह एससीबीए की याचिका का उल्लेख सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष किया गया। इस दौरान सीजेआई ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक गतिविधियां सुचारू रूप से चलनी चाहिए, लेकिन उनके कारण सुप्रीम कोर्ट का कामकाज बाधित नहीं होना चाहिए।

अदालत को राजनीतिक गतिविधियों में न घसीटें

बार एंड बेंच के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हर किसी को शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक गतिविधियों में शामिल होने का अधिकार है। प्रदर्शनकारी किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों, इससे अदालत को कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, अदालत को किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि में नहीं घसीटा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अदालत के कामकाज, वकीलों, कर्मचारियों और पक्षकारों की आवाजाही में बाधा नहीं आनी चाहिए। सभी को अपना काम करने की अनुमति मिलनी चाहिए। सीजेआई ने कहा कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों से भी संयम बरतने की अपील की है। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि प्रत्येक वकील और बार का सदस्य निर्धारित स्थानों पर शांतिपूर्ण गतिविधियों में हिस्सा लेने का अधिकार रखता है।

वरिष्ठ वकील को सड़क पर घसीटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत के निर्देशों के बावजूद पुलिस की ओर से शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मनमाने तरीके से हिरासत में लेने की घटनाएं जारी हैं।

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता फरासत को सड़क पर घसीटा गया, जो बेहद अनुचित था। उन्होंने अदालत से पुलिस को भी संयम बरतने का स्पष्ट संदेश देने का आग्रह किया।

उन्होंने यह भी बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता द्विवेदी और उत्तरा बब्बर को भी बसों में हिरासत में रखा गया था। वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत से पुलिस की ज्यादतियों पर कड़ा संदेश देने की मांग की।

10 अक्टूबर की घटना का याचिका में जिक्र

एससीबीए की याचिका के अनुसार, 10 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के आसपास से गुजर रहे वकीलों के साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें जबरन हिरासत में लेकर कई किलोमीटर दूर ले जाया गया। यह कार्रवाई मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस की कार्रवाई के दौरान हुई। याचिका में कहा गया है कि बाद में सीजेआई के समक्ष मामला उठाए जाने के बाद हिरासत में लिए गए वकीलों को रिहा कर दिया गया। हालांकि, एससीबीए ने पुलिस की कार्रवाई को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि कानून का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी जिन लोगों की है, उन्हीं पर कानून के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं।

पुलिस से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगने की अपील

एससीबीए ने सुप्रीम कोर्ट से पुलिस की कार्रवाई पर स्थिति रिपोर्ट मंगाने की मांग की है। इसमें हिरासत में लिए गए लोगों का विवरण और संबंधित पुलिस अधिकारियों की पहचान की जानकारी देने का अनुरोध भी शामिल है।

याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत जारी निषेधाज्ञाओं के दायरे, उन्हें लागू करने के कारणों और शर्तों की जानकारी मांगी गई है। साथ ही, बैरिकेडिंग और अन्य प्रतिबंधों के कारण दिल्ली में अदालतों तक पहुंच प्रभावित होने के मुद्दे पर भी विचार करने की मांग की गई है।

एससीबीए ने घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, हिरासत के अभिलेख और उपलब्ध होने पर पुलिसकर्मियों के शरीर पर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने का निर्देश देने की अपील की है। याचिका में इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं करने और वकीलों तथा नागरिकों के लिए अदालतों तक पहुंच सुनिश्चित करने की उचित व्यवस्था करने की मांग भी की गई है।

इंटरनेट और पेशेवर कामकाज बाधित नहीं करने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने 11 अक्टूबर को पारित आदेश में अधिकारियों को निर्देश दिया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मनमाने ढंग से हिरासत में नहीं लिया जाए। अदालत ने दिल्ली में इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं करने और पत्रकारों, वकीलों तथा अन्य पेशेवरों के कामकाज में रुकावट नहीं डालने की बात भी कही थी। सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने आरोप लगाया कि इन निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। इस मामले पर भी सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा।