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किशोरों पर बीमारियों का खतरा बढ़ा, 24% नहीं कर रहें पर्याप्त कसरत

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में 11 से 17 साल के हर 4 में से 1 किशोर सप्ताह में एक दिन भी 60 मिनट कसरत नहीं करता। जानें हृदय रोग, डायबिटीज का खतरा और लड़कियों का हाल।
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भारत

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Pushpankar Piyush

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Updated: 7 Nov 2026, 6:57 AM IST

Yog

योग , (PC- IANS)

दुनियाभर में किशोरों का शारीरिक रूप से सक्रिय रहना लगातार बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। पढ़ाई, मोबाइल, टीवी और दूसरे स्क्रीन आधारित मनोरंजन के बीच खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों के लिए उनका समय कम हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में 11 से 17 साल की उम्र के हर 4 में से 1 यानि 24 करोड़ किशोर ऐसे है, जो सप्ताह एक भी दिन कम से कम 60 मिनट की मध्यम से तेज शारीरिक गतिविधि नहीं करते। डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि शारीरिक गतिविधियों की कमी से किशोरों में आगे चलकर हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और कुछ तरह के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

86% किशोर निर्धारित लक्ष्य दूर

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, किशोरों को हर दिन कम से कम 60 मिनट मध्यम से तेज शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। लेकिन, दुनियाभर में किशोर इस लक्ष्य को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सप्ताह में औसतन 2.7 दिन ही किशोर पर्याप्त शारीरिक रूप से सक्रिय रहे। सिर्फ 14% किशोर ही सप्ताह के सातों दिन कम से कम 60 मिनट सक्रिय रहे। यानि 86% किशोर सप्ताह के सभी सात दिन शारीरिक गतिविधि के निर्धारित लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाए।

लड़कियां लड़कों से कम सक्रिय

रिपोर्ट में किशोर लड़कियों और लड़कों के बीच शारीरिक सक्रियता का अंतर भी सामने आया है। लड़कियों में शारीरिक गतिविधियों की कमी ज्यादा देखी गई। 28% लड़कियां सप्ताह एक भी दिन 60 मिनट की पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं कर पाईं। 11% लड़कियां ही सप्ताह भर पर्याप्त शारीरिक रूप से सक्रिय रहीं। वहीं, 17% लड़के सप्ताह भर में पर्याप्त शारीरिक गतिविधि कर पाए। यानी लड़कियों के मुकाबले लड़के ज्यादा सक्रिय हैं।

15 साल में नहीं हुआ कोई खास सुधार

डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में 2010 से 2025 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसमें सामने आया कि पिछले 15 वर्षों में किशोरों की शारीरिक गतिविधियों के स्तर में लगभग कोई बदलाव नहीं आया है। डब्ल्यूएचओ ने यह भी बताया कि कोई भी देश 2030 तक शारीरिक निष्क्रियता में 15% की सापेक्ष कमी लाने के वैश्विक लक्ष्य को हासिल करने की राह पर नहीं है।