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त्योहारी खरीदारी में सावधान! फर्जी वेबसाइट्स का जाल, 8 महीने में 308 करोड़ की साइबर ठगी

त्योहारी सीजन में साइबर ठग सक्रिय हैं। मप्र में 8 महीने में 53,530 शिकायतें और 308.35 करोड़ की ठगी हुई। जानें फर्जी वेबसाइट, फेक कॉल से बचने के जरूरी उपाय।
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भारत

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Anand Prakash Yadav

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Updated: 7 Nov 2026, 1:00 AM IST

online shopping fraud

एक लिंक क्लिक करते ही खाता खाली, त्योहार पर साइबर ठगों से रहें अलर्ट, Photo- ChatGpt

Diwali online shopping fraud: त्योहारी सीजन में जहां एक ओर बाजारों में खरीदारी की धूम है, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराधियों ने भी जाल बिछा रखा है। दिवाली के बाद तक का समय ऑनलाइन ठगी के लिहाज से संवेदनशील माना जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि इस साल शुरुआती आठ महीनों में ही मध्य प्रदेश में साइबर फ्रॉड की 53,530 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इनमें 308.35 करोड़ रुपए की ठगी हुई। हालांकि त्वरित कार्रवाई के चलते पुलिस ने 86.16 करोड़ रुपए बचाने में सफलता भी हासिल की, लेकिन जागरूकता ही इस खतरे से बचने का सबसे बड़ा उपाय है।

ठगी के खतरनाक तरीके

फर्जी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स: ठग नामी कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉम्र्स से मिलती-जुलती वेबसाइट्स तैयार करते हैं। इन पर असली जैसे दिखने वाले लोगो और भारी छूट के लुभावने विज्ञापन दिखाकर ग्राहकों को फंसाया जाता है। भुगतान के बाद न तो सामान मिलता है और न ही पैसे वापस आते हैं।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  • ऑनलाइन खरीदी करनी है तो कंपनियों की अधिकृत वेबसाइट-ऐप्स से ही करें।
  • सोशल मीडिया पर मिलने वाले अनजान या लुभावने शॉपिंग लिंक्स पर क्लिक करने से बचें।
  • किसी भी भारी छूट वाले ऑफर की वास्तविकता की अच्छी तरह जांच कर लें।
  • अपना ओटीपी, यूपीआइ पिन, पासवर्ड या बैंक विवरण किसी के साथ भी साझा न करें।
  • किसी भी अनजान क्यूआर कोड को स्कैन करके भुगतान न करें।
  • हमेशा ध्यान रखें कि बैंक से रिफंड पाने के लिए कभी भी यूपीआइ पिन दर्ज करने की जरूरत नहीं होती।

फेक कॉल और लिंक्स

बैंक अफसर, डिलीवरी एक्जीक्यूटिव या कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर फोन किए जाते हैं। ऑर्डर कैंसिलेशन, रिफंड, गिफ्ट वाउचर या कैशबैक का झांसा देकर मोबाइल पर फर्जी लिंक भेजी जाती हैं या स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स डाउनलोड करवाकर बैंक खाते खाली कर लिए जाते हैं।

सावधानी ही बचाव

अनजान लिंक पर क्लिक न करें: किसी भी अनजान नंबर या सोशल मीडिया पर आए लुभावने ऑफर के लिंक पर क्लिक करने से बचें।
आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग करें: खरीदारी हमेशा संबंधित ब्रांड के आधिकारिक ऐप या वेराइफाइड वेबसाइट से ही करें। गूगल सर्च में टॉप पर दिखने वाला हर रिजल्ट असली नहीं होता।
ओटीपी या पिन साझा न करें: बैंक अधिकारी या कोई भी सरकारी कर्मचारी कभी भी फोन पर ओटीपी, सीवीवी (CVV), या यूपीआई पिन नहीं मांगता। सचार साथी पोर्टल का उपयोग करें: किसी भी संदिग्ध मैसेज की शिकायत संचार साथी के 'चक्षु' (Chakshu) फैसिलिटी पर करें।