इस समझौते के तहत, भारत को यूके में अपने लगभग 99 प्रतिशत निर्यात पर 'जीरो-ड्यूटी' (बिना शुल्क के) पहुंच मिलेगी, जिसमें व्यापार मूल्य का लगभग 100 प्रतिशत हिस्सा शामिल है। उम्मीद है कि यह समझौता भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा, द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार करेगा, निवेश आकर्षित करेगा और व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।