
Women’s Reservation Bill: महिला आरक्षण पर परिसीमन की पैरवी, तेलंगाना BJP अध्यक्ष ने विपक्ष से की समर्थन की अपील (फोटो सोर्स- ANI)
Delimitation in India: देश में महिला आरक्षण को प्रभावी बनाने और संसद तथा विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व बढ़ाने की चर्चा के बीच परिसीमन का मुद्दा फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने विपक्षी दलों से इस प्रक्रिया का विरोध न करने की अपील की है। उनका कहना है कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से सीटों की संख्या बढ़ाने पर विचार जरूरी है और सभी राजनीतिक दलों को इस विषय पर सहमति बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
देश में महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में परिसीमन को अहम कड़ी बताते हुए तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने केंद्र सरकार के प्रस्ताव का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि संसद और राज्य विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने का संवैधानिक प्रावधान मौजूद है और समय-समय पर परिसीमन की प्रक्रिया के जरिए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं की समीक्षा की जाती है।
तेलंगाना भाजपा राज्य अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने मंगलवार एएनआई को हैदराबाद में एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान विधानसभाओं और संसद दोनों में सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रावधान देता है। संसदीय प्रक्रियाओं और सरकार के फैसलों के अनुसार समय-समय पर परिसीमन यानी डिलिमिटेशन करना जरूरी होता है।
उन्होंने याद दिलाया कि पिछली बार यह प्रक्रिया साल 2008 के आसपास हुई थी। अब वक्त आ गया है कि इसे दोबारा लागू किया जाए। खासकर इसलिए क्योंकि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन अनिवार्य है। साथ ही सीटों की संख्या भी बढ़ानी होगी। केंद्र सरकार ने 50 प्रतिशत अनुपातिक वृद्धि का फॉर्मूला अपनाया है। राव के अनुसार यह फॉर्मूला देश के हर क्षेत्र और हर हिस्से को न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व देगा।
तेलंगाना भाजपा प्रमुख ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन से सीधा आग्रह किया कि वे अब इसका विरोध न करें। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली बार उन्होंने सिर्फ राजनीतिक वजहों से विरोध किया था, जिससे महिलाओं के साथ अन्याय हुआ। राव ने उम्मीद जताई कि सभी राजनीतिक दल सरकार के इस फैसले के साथ खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि संसद अभी प्रोरोग नहीं हुई है, इसलिए जल्द ही सत्र बुलाया जा सकता है। देश की हर महिला अब संसद से न्याय की आस लगाए बैठी है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के लागू होने की चर्चा जोरों पर है। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जानी हैं। लेकिन इसका क्रियान्वयन परिसीमन से जुड़ा हुआ है। अप्रैल 2026 में सरकार ने लोकसभा सीटें लगभग 815 तक बढ़ाने और 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने संबंधी विधेयक पेश किए थे, लेकिन दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण वे पास नहीं हो सके। अब अक्टूबर में विशेष सत्र बुलाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
1970 के दशक से लोकसभा सीटों की संख्या 543 पर स्थिर है, जबकि देश की आबादी 54 करोड़ से बढ़कर 140 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। 50 प्रतिशत वृद्धि का फॉर्मूला अपनाने से दक्षिणी राज्यों सहित सभी क्षेत्रों को वर्तमान अनुपात के हिसाब से ज्यादा सीटें मिलेंगी। इससे न तो किसी राज्य का प्रतिनिधित्व घटेगा और न ही महिलाओं को और इंतजार करना पड़ेगा। 2029 के आम चुनाव से पहले आरक्षण लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
Updated on:
20 Oct 2026 10:31 am
Published on:
20 Oct 2026 09:51 am
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