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SIR पर बवाल, पी. चिदंबरम का दावा- अपील करने वाले 90% से ज्यादा लोगों के नाम फिर मतदाता सूची में जुड़े

P. Chidambaram: पश्चिम बंगाल में SIR के तहत करीब 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले में पी. चिदंबरम ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल में निपटाई गई 91-93 प्रतिशत अपीलें मंजूर हुई, जो SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
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gyanesh kumar

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Photo: IANS)

Gyanesh Kumar: देश में मतदाता सूची में सुधार और नाम हटाए जाने की प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने पश्चिम बंगाल में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग को घेरा है। चिदंबरम ने ट्रिब्यूनल के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि जिन लोगों ने अपने नाम काटे जाने के खिलाफ गुहार लगाई थी, उनमें से लगभग 91 से 93 फीसदी अपीलों को स्वीकार कर लिया गया है और उनके नाम दोबारा वोटर लिस्ट में जोड़ने के आदेश दिए गए हैं।

ट्रिब्यूनल के आंकड़ों से चुनाव आयोग को घेरा

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में SIR अभियान के दौरान करीब 27 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए थे। इनमें से लगभग 22.21 लाख लोगों ने इस फैसले के खिलाफ न्यायिक ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया।
उन्होंने बताया कि अब तक ट्रिब्यूनल ने 1.26 लाख से ज्यादा अपीलों का निपटारा किया है, जिसमें से 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में फैसला जनता के पक्ष में आया है। चिदंबरम ने कहा कि यह आंकड़े साबित करते हैं कि जिस तरीके से वोटर लिस्ट से नाम हटाए गए थे, उसमें गंभीर खामियां थीं। यह आंकड़े SIR प्रक्रिया की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत हैं।

जयराम रमेश ने भी बोला हमला, पोर्टल में खामियों का उठाया मुद्दा

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारतीय चुनाव आयोग की अलमारी से लगातार और भी कंकाल बाहर निकल रहे हैं। साफ है कि पीएम-एचएम की रणनीति किसी भी कीमत पर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर कब्जा करना और उसे जीतना थी। यह बड़े पैमाने पर हेरफेर और धांधली का एक उदाहरण था, जिसकी निगरानी CEC ने की थी। कठपुतली को तो जाना ही होगा, लेकिन उन दो कठपुतली संचालकों को भी जवाबदेह ठहराना होगा। उनकी असलियत बुरी तरह उजागर हो चुकी है और अब उन्हें अपने किए का हिसाब देने में बस कुछ ही समय बाकी है।

साथ ही एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत पश्चिम बंगाल में नियुक्त एक दर्जन से अधिक अपीलीय ट्रिब्यूनलों के न्यायाधीशों ने SIR के तहत 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग के डिजिटल पोर्टल में आने वाली बड़ी बाधाओं को औपचारिक रूप से दर्ज कराया था।

विपक्षी दलों का हल्लाबोल, CEC के इस्तीफे की मांग

यह पूरा विवाद ऐसे समय में गरमाया है जब विपक्षी 'INDIA' गठबंधन के नेता दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने राजघाट तक मार्च निकाला और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए CEC के इस्तीफे की मांग की। हालांकि, बीजेपी और चुनाव आयोग ने विपक्ष के इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

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