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सुबह से शाम 8 घंटे तक चीखती-चिल्लाती है ये महिला, कमाती है अच्छे-खासे पैसे

दुनिया में कई लोग ऐसे हैं जो अपने हुनर के बल पर पैसे कमाते है, और उनके हुनर भी ऐसे-वैसे नहीं होते। उनके अंदर कुछ ऐसे नेचुरल टैलेंट कूट-कूट कर भरे होते हैं जिनका इस्तेमाल कर वो अच्छे-खासे पैसे कमाते हैं।
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नई दिल्ली

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Archana Keshri

•

Updated: 17 Jun 2022, 8:34 PM IST

सुबह से शाम 8 घंटे तक चीखती-चिल्लाती है ये महिला, कमाती है अच्छे-खासे पैसे

सुबह से शाम 8 घंटे तक चीखती-चिल्लाती है ये महिला, कमाती है अच्छे-खासे पैसे

दुनिया में कई लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें कुदरत ने अपनी नेमतों से नवाजा होता है। उनके अंदर नेचुरल टैलेंट कूट-कूट कर भरा होता है, जिसका इस्तेमाल करके वो अच्छे-खासे पैसे कमाते हैं। दुनिया में ऐसे कई प्रोफेशन हैं जिनके बारे में सुन कर कई बार आप चौंक जाते होगें। आपने कई ऐसी खबरे पढ़ीं होगी जहां लोगों को खाना टेस्ट करने के लिए पैसे मिलते हैं, तो कहीं सोने के लिए लोगों को सैलरी दी जाती है। मगर आज जिस महिला की हम बात करने जा रहे हैं, वो अपने अंदर के नेचुरल टैलेंट के बल पर अच्छे-खासे कमाती हैं।

हम जिस प्रोफेशन के बारे में बता रहे हैं, वो है चीखना-चिल्लाना। जी हां, एश्ले पेल्डन नाम की ये महिला इसी कला में माहिर हैं और उनका पेशा है चीखना। अब आप सोच रहे होंगे आखिर चीखने-चिल्लाने के पैसे कौन देता होगा, तो आपको बताते चलें एश्ले प्रोफेशनल तौर पर स्क्रीम आर्टिस्ट हैं, यानि की चीखने में माहिर कलाकार। स्क्रीम आर्टिस्ट का काम माइक के सामने घंटों अलग-अलग आवाज में चिल्लाना होता है, जिसे रिकॉर्ड कर फिल्मों में इस्तेमाल किया जाता है।


ये काम बिल्कुल उसी तरह का है जैसे वॉइस डबिंग आर्टिस्ट करते हैं। स्क्रीम आर्टिस्ट तरह-तरह की चीखें निकालते हैं और वे इसका इस्तेमाल करके पैसे कमाते हैं। एश्ले पेल्डन भी फिल्मों के लिए भूतों की चिल्लाने वाली, दहाड़ मार-मारकर रोने वाली आवाजे निकालती हैं। फिल्मों में भूतों की और रोने की बैकग्राउंड आवाजें एश्ले जैसे कलाकारों का ही कमाल होता है।


अब आपको समझ में आ रहा होगा कि आखिर भूत को देखकर चिल्लाने वाली एक्ट्रेस या फिर दहाड़ मार-मारकर रोने वाली आवाज़े इतनी सही परफेक्ट कैसे होती हैं। एश्ले फिल्मों और टीवी सीरीज़ में चिल्लाने-चीखने के सीन के लिए अपनी आवाज़ देती हैं। एश्ले का कहना है कि कि ये किसी स्टंट मैन जैसा काम है। आपको अलग वक्त में अलग तरह से चीखना होता है। आपको पता होना चाहिए कि कब और कैसे रुकना है।

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एश्ले के अनुसार, वो इस कला में माहिर हैं, उन्हें चीखने की कला के लिए कोई प्रैक्टिस नहीं करनी होती है, ये कुदरती तौर पर आती है। उनके मुताबिक प्री-प्रोडक्शन के वक्त से ही उनका काम शुरू हो जाता है। उन्हें पता होता है कि कब और कैसे चीखना है। किसी कीड़े को देखने की चीख अलग होती है, डरने की चीख अलग होती है और खुशी से चिल्लाने की चीख अलग होती है। एश्ले के अनुसार 8 घंटे तक इस तरह चिल्लाने के बाद वे कई बार बहुत थका हुआ महसूस करती हैं लेकिन उन्हें अपना काम पसंद है, और अपने इस काम से वो खुश हैं।


ऐश्ले जब 7 साल की थीं, तभी उनके इस टैलेंट के बारे में पता चला। उस वक्त तब 'चाइल्ड ऑफ एंगर' नाम की फिल्म में काम कर रही थीं, जिसमें चीखने-चिल्लाने के तमाम सीन थे। उसी वक्त वे इस पेशे से जुड़ी हैं। 20-25 साल की उम्र तक वे 40 फिल्मों और टीवी सीरीज़ में अपनी आवाज़ दे चुकी हैं।

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