
Engineer Rashid Case: जम्मू और कश्मीर अवामी इत्तेहाद पार्टी के संस्थापक और संरक्षक इंजीनियर राशिद को संसद के बजट सत्र में भाग लेने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने सशर्त अनुमति दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि राशिद संसद की कार्यवाही में भाग ले सकते हैं, लेकिन उन्हें जेल से संसद और संसद से जेल तक आने-जाने के लिए सिक्योरिटी और यात्रा भत्ते के रूप में करीब डेढ़ लाख रुपये प्रतिदिन का भुगतान करना होगा। हाईकोर्ट ने उन्हें छह दिन के लिए अनुमति दी थी। इस दौरान करीब 8,74,716 रुपये का भुगतान करने को कहा गया था। इसके बाद इंजीनियर राशिद ने दिल्ली हाईकोर्ट में इस भत्ते को माफ करने के लिए याचिका डाली है।
दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को यह आदेश जारी किया था। इसके बाद इसे बुधवार को सार्वजनिक किया गया। राशिद के अधिवक्ता विख्यात ओबेरॉय ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि राशिद को बुधवार रात 8:21 बजे जेल प्रशासन की ओर से एक ईमेल प्राप्त हुआ है। उसमें हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी दी गई है। जिसमें कहा गया है कि राशिद को संसद में उपस्थिति के लिए अनुमति तो दी जा रही है, लेकिन वह कोर्ट की हिरासत में रहते हुए अपनी यात्रा का पूरा खर्च स्वयं वहन करेंगे।
इसमें पुलिस सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का खर्च भी शामिल है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार जम्मू और कश्मीर के बारामुला से सांसद इंजीनियर राशिद के दिल्ली की तिहाड़ जेल से संसद तक जाने और संसद से तिहाड़ जेल वापस आने में यात्रा, सिक्योरिटी और अन्य व्यवस्थाओं पर प्रतिदिन कुल Rs. 1,45,736 का खर्च आएगा। इस प्रकार छह दिनों के लिए उन्हें कुल Rs. 8,74,716 भुगतान करना होगा। इसके बाद बुधवार को राशिद की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि वह एक हिरासत में रखे गए व्यक्ति हैं। इसलिए इतने लंबे खर्च का प्रबंध करना उनके लिए संभव नहीं है।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, अपने अधिवक्ता के माध्यम से राशिद ने हाईकोर्ट को बताया कि यह राशि बहुत ज्यादा है। वह आर्थिक रूप से इतनी बड़ी राशि वहन करने की स्थिति में नहीं हैं। राशिद ने यह भी बताया कि फरवरी में जब उन्हें बजट सत्र में भाग लेने के लिए दो दिन की कस्टडी पैरोल दी गई थी। तब यात्रा और सुरक्षा संबंधी खर्च की भरपाई करने की कोई शर्त नहीं थी। गुरुवार को संसद में उपस्थित होने की संभावनाओं को लेकर इंजीनियर राशिद ने अपनी याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट को यह भी बताया है कि उन्होंने बड़ी मुश्किल से एक दिन के खर्च की व्यवस्था की है। इसके लिए उनके संसदीय क्षेत्र के दो-तीन लोगों ने चंदा इकट्ठा कर अपने व्यक्तिगत खातों से जेल प्रशासन को भुगतान किया है।
दरअसल, दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद जम्मू कश्मीर के बारामुला सांसद इंजीनियर राशिद ने दिल्ली हाईकोर्ट को संसद की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति मांगी थी। इसकी सुनवाई करते हुए मंगलवार को हाईकोर्ट में जस्टिस चंद्र धारी सिंह और जस्टिस अनुप भाम्भानी की डिवीजन बेंच ने राशिद को संसद में भाग लेने की अनुमति देते हुए कहा था “गंभीर आरोपों के बावजूद, एक सांसद होने के नाते राशिद की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वह अपने क्षेत्र की जनता का संसद में प्रतिनिधित्व करें। इसलिए उन्हें छह दिन तक संसद की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दी जाती है, लेकिन इस दौरान आने वाले खर्च को वह स्वयं वहन करेंगे।” कोर्ट ने ये भी कहा था कि इंजीनियर राशिद फोन या इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। इसके साथ ही वह मीडिया से भी बात नहीं करेंगे।
गौरतलब है कि टेरर फंडिंग मामले में इंजीनियर राशिद को 2019 में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अनुसार, राशिद ने कई सार्वजनिक मंचों का इस्तेमाल अलगाववाद और भारत विरोधी विचारधारा को फैलाने के लिए किया। एजेंसी का दावा है कि वह कई आतंकवादी संगठनों से निकट संपर्क में थे और जम्मू-कश्मीर में भारत विरोधी आतंकवादी संगठनों के गठजोड़ 'यूनाइटेड जिहाद काउंसिल' को वैधता दिलाने की कोशिश कर रहे थे।
वह साल 2024 के लोकसभा चुनाव में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को दो लाख से अधिक वोटों से हराकर सांसद बने हैं। इसके बाद उनकी संसद में उपस्थिति को लेकर कानूनी और प्रशासनिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। उन्होंने 10 मार्च के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें लोकसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए 4 अप्रैल तक अभिरक्षा पैरोल या अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
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Updated on:
27 Mar 2025, 12:50 PM IST
Published on:
27 Mar 2025, 12:50 PM IST
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