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कुंडली विचार : क्या आप जानते हैं कैसे देखते हैं कुंडली, यहां जानें जन्मपत्री देखने का आसान तरीका

इस लेख में प्रयागराज के पंडित आचार्य प्रदीप पांडे आपको बता रहे हैं कुंडली देखने का आसान तरीका, जिससे आप घर बैठे ही अपना भूत, वर्तमान और भविष्य पढ़ सकते हैं...

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Sanjana Kumar

Dec 29, 2022

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भोपाल। जन्म कुंडली, यानी ऐसी पत्रिका जिसमें आप अपना भूत, वर्तमान और भविष्य आसानी से देख सकते हैं। कुछ परेशानियां हैं तो उपाय सोच सकते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर जन्म कुंडली यानी जन्म पत्री आखिर कैसे देखी जाती है। इस लेख में प्रयागराज के पंडित आचार्य प्रदीप पांडे आपको बता रहे हैं कुंडली देखने का आसान तरीका, जिससे आप घर बैठे ही अपना भूत, वर्तमान और भविष्य पढ़ सकते हैं।

पहले जानें कुंडली है क्या?
जन्म कुंडली आपके जन्म की वह पत्रिका है, जिसमें आपके जन्म के समय आकाश मंडल में ग्रह, नक्षत्र और राशियों की वास्तविक स्थिति है, उसे दर्शाती है। कुंडली में बारह खाने होते हैं और इन खानों में राशियां और ग्रह बैठे होते हैं। इनके माध्यम से व्यक्ति के भाग्य की गणना की जाती है। कुंडली में जो नंबर होते हैं, वे राशियों को दर्शाते हैं।

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यहां जानें क्या कहते हैं कुंडली में स्थित भाव
कुंडली में जो 12 अलग-अलग खाने हैं यही भाव या घर कहलाते हैं। ये 12 खाने या भाव व्यक्तिके संपूर्ण जीवन की व्याख्या करते हैं। नीचे पढ़ें संक्षिप्त रूप में क्या कहता है हर भाव...

- पहला भाव व्यक्ति के चरित्र, स्वभाव, रंग-रूप के बारे में बताता है। इसे लग्न भाव भी कहते हैं।
- दूसरा भाव धन, वाणी और प्रारंभिक शिक्षा का होता है।
- तीसरा छोटे भाई-बहन, साहस, पराक्रम का होता है।
- चौथा भाव सुख भाव कहलाता है। इस भाव से माता, वाहन, प्रोपर्टी आदि चीजों को देखा जाता है।
- पांचवां भाव उच्च शिक्षा, संतान, प्रेम, रोमांस की विवेचना करता है।
- छठा भाव शत्रु, रोग, प्रतियोगित आदि को दर्शाता है।
- सातवां भाव विवाह भाव होता है। इस भाव से जीवनसाथी और जीवन में होने वाली किसी भी तरह की पार्टनरशिप को देखा जाता है।
- आठवां भाव जीवन में अचानक आने वाली घटनाओं का बोध कराता है।
- नवां भाव धर्म, गुरु और भाग्य, लंबी दूरी की यात्रा का होता है।
- दसवां घर कर्म भाव कहलाता है। इस भाव से व्यक्ति के प्रोफेशन और उसके पिता को देखा जाता है।
- ग्यारहवां भाव लाभ का घर होता है। इससे आमदनी और जीवन में प्राप्त होने वाली सभी प्रकार की उपलब्धियों, बड़े भाई-बहन, मित्र आदि को देखा जाता है।
- बारहवां घर हानि का भाव होता है। इससे जीवन में होने वाली सभी तरह की हानियों, खर्च, विदेश यात्रा आदि को देखा जाता है।

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जन्म कुंडली में राशियों की जानकारी
इन 12 भावों में राशियां बैठी होती हैं। एक भाव में एक राशि होती है। मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ, मीन। इन प्रत्येक राशियों का अपना स्वभाव, चरित्र होता है। पहले खाने में व्यक्ति की जो राशि होती है उसे लग्न राशि कहते हैं। जबकि जिस राशि में चंद्रमा बैठा हो उसे चंद्र और जिसमें सूर्य बैठा हो उसे सूर्य राशि कहते हैं।

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कुंडली में ग्रह राशि
आपकी कुंडली के भाव में ग्रह बैठे होते हैं। जन्मपत्री के किसी भाव में एक, दो या इससे अधिक ग्रह बैठे हो सकते हैं। ग्रह के योग को युति कहते हैं। इन ग्रहों का आपस में संबंध है। ये संबंध शत्रुता, मित्रता और सम भाव का होता है। ज्योतिष में इन ग्रहों की संख्या नौ है। सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु। इन ग्रहों का अपना-अपना स्वभाव होता है। इनमें चंद्र, बृहस्पति और शुक्रसौम्य ग्रह माने गए हैं। वहीं सूर्य, मंगल, शनि और राहु-केतु क्रूर ग्रहों की श्रेणी में आते हैं। इसके साथ ही राशियों के साथ भी इनका संबंध होता है। राहु-केतु को छोड़कर सभी ग्रह एक या दो राशि के स्वामी होते हैं। इन सभी ग्रहों की कोई उच्च राशि होती है तो कोई नीच राशि होती है।

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कुंडली में ग्रहों की दृष्टि शुभ या अशुभ
कुंडली देखने के लिए हमें ग्रहों की दृष्टि का पता होना चाहिए। ये दृष्टि शुभ और अशुभ दोनों प्रकार की हो सकती है। सभी ग्रह जिस भाव में बैठे हैं, उससे सातवें घर को देखते हैं। हालांकि कुछ ग्रह सातवें के अलावा भी अन्य भावों पर दृष्टि रखते हैं। जैसे मंगल चौथे और आठवें घर को भी देखता है। बृहस्पति अपने स्थान से पंचम और नवम भाव को भी देखता है। जबकि शनि अपने स्थान से तीसरे और दसवें भाव पर भी दृष्टि रखता है। वहीं राहु-केतु सातवें भाव के अलावा पंचम और नवम भाव को देखते हैं।

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कुंडली देखने का आसान तरीका
नीच राशि में ग्रह शुभ फल नहीं देते हैं। उच्च राशि में कोई भी ग्रह शुभ फलकारी होता है। शत्रु ग्रहों के साथ युति से नकारात्मक फल प्राप्त होता है। ग्रहों की दृष्टि का फल राशि और उसके संबंधानुसार पड़ता है। मित्र ग्रहों की युति शुभ फलकारी होती है। कुंडली में बनने वाले राजयोग के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए।