
shive
जन्म और मृत्यु भगवान के हाथ में है। कोई नहीं जानता उसे कब मत्यु आ जाए। मृत्यु के पश्चात आत्मा शरीर का त्याग कर देती है। मृत व्यक्ति दोबारा जीवित नहीं हो सकता यहीं जीवन का सत्य है, लेकिन देहरादून में एक ऐसा स्थान है, जहां पर किसी व्यक्ति का शव ले जाया जाए तो वह पुन: जीवित हो जाता है। देहरादून से 128 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लाखामंडल नामक स्थान यमुना नदी की तट पर बर्नीगाड़ नामक जगह से सिर्फ 4-5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
समुद्र तल से इस स्थान की ऊंचाई लगभग 1372 मीटर है। इसके विषय में कहा जाता है कि यदि यहा पर मृत व्यक्ति को लाया जाए तो वह पुन: जीवित हो जाता है। इस स्थान की खुदाई के समय विभिन्न आकार और अलग-अलग काल के हजारों शिवलिंग प्राप्त हुए हैं। माना जाता है कि पांडवों को जीवित आग में भस्म करने के लिए कौरवों ने यहीं लाक्षागृह का निर्माण करवाया था।
माना जाता है कि युधिष्ठिर ने अज्ञातवास के समय यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। आज भी यह शिवलिंग महामंडेश्वर के नाम से प्रसिद्ध है। यहां एक खूबसूरत मंदिर का निर्माण भी करवाया गया था। शिवलिंग के सामने दो द्वारपाल पश्चिम की और मुंह करके खड़े हुए दिखाई देते हैं।
माना जाता है कि मंदिर में यदि किसी शव को इन द्वार पालों के सम्मुख रखकर मंदिर का पुजारी जल छिड़के तो वह व्यक्ति कुछ समय के लिए पुन: जीवित हो जाता है। जब वह व्यक्ति जीवित हो जाता है तो उसे गंगाजल दिया जाता है। गंगाजल ग्रहण करने के पश्चात उसकी आत्मा फिर से उसकी देह त्यागकर चली जाती है। इससे संबंधित रहस्य के बारे में आज तक कोई नहीं जान पाया।
Published on:
25 Sept 2016 07:31 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
