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10 अक्टूबर को पितृपक्ष अमावस्या पर शनिश्चरी अमावस्या का संयोग, जानें पितृदोष और शनि के उपाय

Shanishchari Amavasya: पितृपक्ष की सर्वपितृमोक्ष अमावस्या इस बार शनिश्चरी अमावस्या के दुर्लभ संयोग के साथ आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तर्पण, श्राद्ध और शनि पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
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भारत

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Akash Dewani

•

Oct 02, 2026

pitru paksha shanishchari amavasya 2026 pitru dosh

Pitru Paksha Shanishchari Amavasya: 3 साल बाद दुर्लभ संयोग में आएगा शनिश्चरी अमावस्या (फोटो सोर्स- ChatGPT)

Pitru Paksha 2026: इन दिनों पितृपक्ष पखवाड़ा चल रहा है। इसमें श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्धकर्म, तर्पण, पिंडदान कर रहे है। 10 अक्टूबर को सर्वपितृमोक्ष अमावस्या के साथ इस पखवाड़े का समापन हो जाएगा। इस बार इस दिन शनिश्चरी अमावस्या का संयोग भी बन रहा है। ऐसे में पितृदोष के साथ-साथ शनि पीड़ा से मुक्ति के लिए भी यह दिन विशेष शुभ होगा। तीन साल बाद इस तरह का संयोग बन रहा है। इसके पहले 14 अक्टूबर 2023 को भी इस तरह का संयोग बना था।

क्यों विशेष माना जाता है पखवाड़ा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष पखवाड़ा पितरों की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस पखवाड़े में पितर भूलोक पर रहते है। इसलिए पूरे पखवाड़े में पूर्वजों की मृत्यु तिथि पर श्राद्धकर्म तर्पण किए जाते हैं। जिन पितरों की श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं होती या किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाता, उनके निमित्त सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करने की परंपरा है। इस दिन पितरों का स्मरण कर तर्पण करने और ब्राह्मण भोज, अन्न-वस्त्र दान तथा जरूरतमंदों की सेवा करने का विधान बताया गया है।

शनिश्चरी अमावस्या पर मंदिरों में भीड़

इस बार सर्वपितृमोक्ष के साथ-साथ शनिश्चरी अमावस्या का संयोग भी बन रहा है। यह साल की एकमात्र शनिश्चरी अमावस्या (Shanishchari Amavasya) होगी। जिस दिन अमावस्या तिथि शनिवार को आती है तो यह संयोग बनता है। पंडितों के अनुसार यह दिन शनिदेव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ होता है। श्रद्धालु शनि मंदिर में दर्शन कर तिल के तेल का दीपक अर्पित करेंगे तथा काले तिल, उड़द, वस्त्र और अन्न का दान करेंगे। मान्यता है कि सेवा, दान और संयम के साथ की गई शनि उपासना से साढ़े साती, ढैया सहित शनि की महादशा, कष्टों में राहत मिलती है।

शनिश्चरी अमावस्या का महत्व

शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्म के आधार पर फल देते हैं। शनिदेव, जिनके गुरु स्वयं भगवान शिव हैं, जब प्रसन्न होते हैं तो ढेर सारी खुशियां देते हैं, लेकिन जब कोई कुछ गलत करता है, तो वह शनि की दृष्टि से नहीं बच सकता। शनिश्चरी अमावस्या का दिन शनि से संबधित परेशानियों जैसे शनि की साढे-साती और ढैय्या से मुक्ति पाने के लिये बहुत ही अच्छा है। साथ ही इस दिन पितृ दोष आदि से भी छुटकारा पाया जा सकता है।