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Patrika Podcast : मां है भगवती

स्त्री दिव्यता की मूर्ति है। माया है, शक्ति है। ब्रह्म को आवृत कर स्वगर्भ में धारण करती है। स्त्री की दिव्यता का आधार उसका भगवती स्वरूप है। धर्म, ज्ञान, वैराग्य, ऐश्वर्य, यश और श्री इन छह भावों से युक्तता ही भगवान कहे जाने हेतु आवश्यक है। ब्रह्माण्ड शृंखला में सुनें पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी का यह विशेष लेख- मां है भगवती
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भारत

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Opinion Desk

Aug 07, 2026

sharir hi brahmand

sharir hi brahmand

Gulab Kothari Article शरीर ही ब्रह्माण्ड: विवेक और बोध ही ज्ञान है। स्त्री में चेतना के जागरण के साथ ही पुरुष-बीज के चयन का ज्ञान होता है। इसी से आकृष्ट होकर स्त्री पति के साथ एकाकार होती है तथा पुरुष-बीज को ग्रहण करती है। पुरुष अर्थात् पिता तर्क प्रदान करता है किंतु जीवन व्यवहार और भावनात्मक बुद्धि हेतु अन्तर्मन और विवेक माता देती है।

पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की बहुचर्चित आलेखमाला है - शरीर ही ब्रह्माण्ड। इसमें विभिन्न बिंदुओं/विषयों की आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्याख्या प्रस्तुत की जाती है। गुलाब कोठारी को वैदिक अध्ययन में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उन्हें 2002 में नीदरलैन्ड के इन्टर्कल्चर विश्वविद्यालय ने फिलोसोफी में डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया था। उन्हें 2011 में उनकी पुस्तक मैं ही राधा, मैं ही कृष्ण के लिए मूर्ति देवी पुरस्कार और वर्ष 2009 में राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान से सम्मानित किया गया था। 'शरीर ही ब्रह्माण्ड' शृंखला में प्रकाशित विशेष लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें नीचे दिए लिंक्स पर-

शरीर ही ब्रह्माण्ड: आत्मप्रकाश ही भगवत्ता

शरीर ही ब्रह्माण्ड: श्रद्धा है माया का प्रतिबिम्ब

शरीर ही ब्रह्माण्ड:भिन्न है ईश्वर और जीव की कामना

शरीर ही ब्रह्माण्ड:माया:ब्रह्म की संचालक

शरीर ही ब्रह्माण्ड: दाहक होता स्त्रैण संकल्प