
sharir hi brahmand
Gulab Kothari Article शरीर ही ब्रह्माण्ड: विवेक और बोध ही ज्ञान है। स्त्री में चेतना के जागरण के साथ ही पुरुष-बीज के चयन का ज्ञान होता है। इसी से आकृष्ट होकर स्त्री पति के साथ एकाकार होती है तथा पुरुष-बीज को ग्रहण करती है। पुरुष अर्थात् पिता तर्क प्रदान करता है किंतु जीवन व्यवहार और भावनात्मक बुद्धि हेतु अन्तर्मन और विवेक माता देती है।
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की बहुचर्चित आलेखमाला है - शरीर ही ब्रह्माण्ड। इसमें विभिन्न बिंदुओं/विषयों की आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्याख्या प्रस्तुत की जाती है। गुलाब कोठारी को वैदिक अध्ययन में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उन्हें 2002 में नीदरलैन्ड के इन्टर्कल्चर विश्वविद्यालय ने फिलोसोफी में डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया था। उन्हें 2011 में उनकी पुस्तक मैं ही राधा, मैं ही कृष्ण के लिए मूर्ति देवी पुरस्कार और वर्ष 2009 में राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान से सम्मानित किया गया था। 'शरीर ही ब्रह्माण्ड' शृंखला में प्रकाशित विशेष लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें नीचे दिए लिंक्स पर-
Updated on:
07 Aug 2026 07:20 pm
Published on:
07 Aug 2026 07:20 pm
