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Noida : युवाओं की सरकारी नौकरी लगाने के लिए फर्जी डिग्री और डिप्लोमा बेचने वाले गैंग का खुलासा

नोएडा पुलिस ने सरकारी नौकरी के लिए फर्जी डिग्री और डिप्लोमा बेचने वाले एक गैंग के दो जालसाजों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 85 फर्जी मार्कशीट, 8 फर्जी मुहर, 33 मोबाइल फोन, 14 कंप्यूटर और 55 सिम बरामद किए हैं। जालसाज आनंद शेखर और चिराग शर्मा 10 साल से इस धंधे में लिप्त थे।
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नोएडा

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lokesh verma

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Updated: 19 Sep 2022, 1:43 PM IST

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नोएडा सेक्टर-63 पुलिस ने सरकारी नौकरी के लिए फर्जी डिग्री और डिप्लोमा बेचने वाले एक अंतरराज्यीय गैंग का पर्दाफाश करते हुए दो जालसाजों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों के पास से 85 फर्जी मार्कशीट, सात खाली मार्कशीट, 8 फर्जी मुहर, 33 मोबाइल फोन, 14 कंप्यूटर और 55 सिम बरामद किए हैं। इनके पास से 2000, 2002 तक की पुरानी फर्जी डिग्री और डिप्लोमा भी बरामद किए गए हैं। पुलिस गिरफ्त आए जालसाजों के नाम आनंद शेखर और चिराग शर्मा हैं।

एडीसीपी सेंट्रल जोन साद मियां ने बताया कि यह गैंग 20 से 80 हजार रुपये तक में एमबीए, एमटेक आदि की फर्जी डिग्री और डिप्लोमा बेचता था। आरोपी सोशल मीडिया पर गूगल के माध्यम से विज्ञापन देते थे। इन विज्ञापनों में वह डिग्री और डिप्लोमा का लालच देकर लोगों को अपने झांसे में फंसाते थे और एक बार फोन आने या विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद वह खुद ही उनसे संपर्क करते थे और उन्हें ठगी का शिकार बनाते थे।

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बेंगलुरु में भी पकड़ा गया था आनंद शेखर

एडीसीपी सेंट्रल नोएडा ने बताया ये लोग कोचिंग संस्थानों, कॉलेज आदि से भी छात्र-छात्राओं के बारे में जानकारी जुटाकर उन्हें फोन करते थे और उन्हें कम पैसे और कम मेहनत में डिग्री और डिप्लोमा उपलब्ध कराने का झांसा देते थे। इसके लिए वह खुद को विद्या भारती इंस्टीट्यूट और एम्पिरियल इंस्टीट्यूट का संचालक बताते थे। जबकि इस नाम से कोई इंस्टीट्यूट नहीं था। पुलिस ने बताया कि नोएडा से पहले बेंगलुरु में इसी तरह से लोगों को डिप्लोमा और डिग्री बेचने का धंधा किया गया था। बेंगलुरु में जनवरी 2022 में आनंद शेखर को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वहां से जमानत मिलने के बाद मार्च 2022 में उसने नोएडा में आकर अपना यह धंधा फिर से प्रारंभ कर दिया था।

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10 साल से लिप्त थे गोरखधंधे में

एडीसीपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि पिछले 10 साल से फर्जी मार्कशीट, डिग्री और डिप्लोमा बेचने का काम कर रहे हैं और इस दौरान वह हजारों लोगों को यह उपलब्ध करा चुके हैं। इनसे पूछताछ कर इस संबंध में और जानकारी जुटाई जा रही है कि उन्होंने किन-किन लोगों को यह फर्जी डिग्री-डिप्लोमा उपलब्ध कराए है। फर्जी डिग्री और डिप्लोमा लेने वालों को भी पुलिस अपनी जांच में शामिल करेगी।