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‘शानदार काम कर रहा है मानवाधिकार आयोग, SC दे सकता है और अधिकार’

जस्टिस एचएल दत्तू ने कहा- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अपना काम सही से कर रहा है
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Rajkumar Pal

Oct 21, 2016

National Human Rights Commission

National Human Rights Commission

नई दिल्ली/नोएडा। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग जिस उद्देश्य को लेकर 1993 में गठित हुआ था। वह उसे बहुत सही ढंग से पूरा कर रहा है। लेकिन इसके साथ ही आयोग को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट आने वाले समय में उसे और अधिक अधिकार देगा। जिससे वह अपने निर्देशों को सही ढंग से लागू करवा सके। यह बात आयोग के चेयरमैन पूर्व जस्टिस एचएल दत्तू ने कही।
उन्होंने कहा कि एनएचआरसी के गठन का उद्देश्य सफल रहा, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, आयोग ने अब तक एक लाख से भी अधिक मामलों का निबटारा किया है। आयोग ने मामलों को न सिर्फ निबटाया है, बल्कि सिर्फ पिछले एक साल में ही 380 शिकायतकर्ताओं को सत्तर लाख रूपये से अधिक की सहायता राशि उपलब्ध करवाई है।

इस सवाल पर कि क्या मानवाधिकार आयोग अपने निर्देशों को पूरी तरह लागू करवा पाता है। न्यायमूर्ति दत्तू ने कहा कि इस सन्दर्भ में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने एक निर्णय में साफ कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश होते हैं, इसके आलावा उसके चार अन्य सदस्य भी जज या कानूनी विषयों के जानकार होते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की अनुशंषायें भी एक अदालत की तरह पालन करने के योग्य होती हैं। जिसका पालन किया जाना चाहिए।

हालांकि किसी पक्षकार को आयोग के निर्णयों से आपत्ति हो तो वह सामान्य उच्च न्यायालयों या उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकता है। उन्होंने कहा कि इसी सन्दर्भ में एक मामला पहले ही उच्चतम न्यायालय में चल रहा है, वे उम्मीद करेंगे कि आने वाले समय में उन्हें और अधिकार मिलें जिससे वे अपने कर्तव्यों के निर्वहन में ज्यादा सक्षम हो सकें।

उत्तर प्रदेश इस मामले में अव्वल

जस्टिस दत्तू ने कहा कि न्यायिक हिरासतों में लोगों के साथ होने वाली अमानवाय घटनाओं के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है। न्यायिक हिरासत, पुलिस हिरासत या जेलों के अंदर किसी कैदी के मामलों में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है। यह आंकड़ा यूपी में 401 रहा, जबकि देश के अन्य राज्य इस मामले में पीछे रहे। संपूर्णता की दृष्टि से देखें तो छत्तीस गढ़ राज्य में मानवाधिकार हनन की बहुत अधिक घटनाएं होती हैं। उत्तरी राज्यों की तरह दक्षिण के राज्य भी इस मामले में पीछे नहीं हैं। हालांकि पूर्वी राज्यों में मानवाधिकार हनन की अपेक्षाकृत कम घटनाएं घटती हैं।