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Gulveer Singh: भारत की झोली में एक और पदक, गुलवीर सिंह ने 10,000 मीटर में जीता सिल्वर

Gulveer Singh wins silver: भारत के गुलवीर सिंह ने आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया।
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ASIAN GAMES 2026

लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह। (Photo- IANS)

Asian Games 2026: भारत के गुलवीर सिंह ने शुक्रवार को आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने अपने तेजी से बढ़ते अंतरराष्ट्रीय पदक संग्रह में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली। गुलवीर सिंह 25 लैप की इस दौड़ में लगातार पदक की दौड़ में बने रहे। आखिरकार उन्होंने 28:29.38 का निकाला और दूसरे स्थान पर रहते हुए सिल्वर अपने नाम किया। इसके साथ ही उन्होंने इस स्पर्धा में लगातार दूसरे एशियन गेम्स में पदक जीतने की उपलब्धि हासिल की।

बहरीन के बिरहानु बालेव ने 28:27.51 के समय के साथ शानदार अंतिम दौड़ लगाते हुए गोल्ड मेडल जीता। वहीं, उनके हमवतन अल्बर्ट किप्टू ने 28:34.38 के समय के साथ ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

एशियन गेम्स 2023 में जीता था ब्रॉन्ज मेडल

गुलवीर ने एशियन गेम्स के पिछले संस्करण की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने 2022 में हांगझोउ में आयोजित एशियाई खेलों में पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।

गुलवीर ने पिछले कुछ वर्षों में शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने 2025 में दक्षिण कोरिया के गुमी में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5,000 मीटर और 10,000 मीटर दोनों स्पर्धाओं में गोल्ड मेडल जीते थे।

2026 के ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में वह एक ही संस्करण में ट्रैक स्पर्धाओं में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने 10,000 मीटर में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य पदक जीता था। इससे पहले गुलवीर ने 2023 में बैंकॉक में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पुरुषों की 5,000 मीटर स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था।

सेना में भर्ती होने के लिए शुरू की थी दौड़

किसान परिवार में जन्मे 28 वर्षीय गुलवीर सिंह के गांव में खेलों में करियर बनाने से ज्यादा सेना में भर्ती होने की चर्चा होती थी। उनके लिए दौड़ पदक जीतने का जरिया नहीं, बल्कि सेना में नौकरी हासिल करने का माध्यम था। सेना में शामिल होने के बाद उनका परिचय प्रतिस्पर्धी दौड़ और एथलेटिक्स से हुआ। यहीं से उनकी जिंदगी ने एक नई दिशा पकड़नी शुरू की।

सेना की ट्रेनिंग और अनुशासन के बीच गुलवीर को अपनी दौड़ की प्रतिभा को निखारने का मौका मिला। नौकरी के दौरान उन्हें कठिन इलाकों में भी तैनाती मिली, लेकिन उन्होंने अपनी तैयारियों से समझौता नहीं किया। चुनौतियों के बावजूद वह लगातार अभ्यास करते रहे और खुद को लंबी दूरी की दौड़ के लिए तैयार करते गए। सेना से मिले अनुशासन और मेहनत ने उनकी प्रतिभा को तराशा और धीरे-धीरे यही दौड़ उनकी पहचान बन गई।