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टॉपर घोटाला के बाद बिहार बोर्ड के अध्यक्ष बनाए गए थे IAS आनंद किशोर, 10 साल बाद क्यों हटाए गए?

IAS Anand Kishore News: 10 साल के लंबे कार्यकाल के बाद IAS अधिकारी आनंद किशोर को बिहार बोर्ड (BSEB) के चेयरमैन पद से हटा दिया गया है। आनंद किशोर ने 2016 के टॉपर स्कैम के बाद बोर्ड की साख बचाने की ज़िम्मेदारी संभाली थी। अब वो सिर्फ पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव के तौर पर काम कर रहे हैं।

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पटना

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Anand Shekhar

Jun 19, 2026

IAS Anand Kishor

IAS आनंद किशोर (फोटो- स्मार्ट सिटी पटना वेबसाइट)

IAS Anand Kishore Transfer: बिहार सरकार ने गुरुवार देर रात 11 जिलों के डीएम सहित 21 IAS अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया। खास बात यह है कि इस तबादला सूची में आनंद किशोर का नाम भी शामिल है। 1996 बैच के सीनियर IAS अधिकारी आनंद किशोर को बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) के चेयरमैन पद से हटा दिया गया है। किशोर ने पूरे एक दशक तक बिहार बोर्ड के चेयरमैन के तौर पर काम किया। अब वे सिर्फ़ पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव के पद पर बने रहेंगे।

आनंद किशोर ने कई अहम पद पर दिया योगदान

बिहार कैडर के 1996 बैच के IAS अधिकारी आनंद किशोर का जन्म 6 नवंबर 1971 को हुआ था। उनके पास इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में एडवांस्ड डिग्री (B.Tech और M.Tech) है और वे अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में माहिर हैं। अपने लंबे प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया है, जिनमें सब-डिविजनल ऑफिसर (SDO), जॉइंट सेक्रेटरी, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM), डिविजनल कमिश्नर, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO), मैनेजिंग डायरेक्टर (MD), स्पेशल सेक्रेटरी और प्रिंसिपल सेक्रेटरी शामिल हैं। नीतीश सरकार में उनका इतना प्रभाव था कि उन्हें सबसे ताकतवर अधिकारियों में गिना जाता था।

टॉपर घोटाला के बाद बिहार बोर्ड साफ करने आए थे आनंद किशोर

बिहार बोर्ड से आनंद किशोर का जाना कोई मामूली प्रशासनिक फेरबदल नहीं है। साल 2016 में जब बिहार में 'इंटर टॉपर स्कैम' (रूबी राय कांड) सामने आया, तो पूरे देश में बिहार की शिक्षा व्यवस्था की बदनामी हुई थी। इसके बाद तत्कालीन चेयरमैन लालकेश्वर प्रसाद जेल चले गए, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 9 जून 2016 को बिहार बोर्ड की कमान आनंद किशोर को सौंपी, जिन्हें बहुत सख्त मिजाज का माना जाता था।

कमान संभालते ही आनंद किशोर ने बोर्ड में नई जान फूंक दी और परीक्षाओं को पूरी तरह से डिजिटल और बारकोड-आधारित बना दिया। बिहार बोर्ड देश का पहला ऐसा बोर्ड बना जिसने लगातार कई वर्षों तक सबसे पहले और रिकॉर्ड समय में नतीजे घोषित करके राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए।

क्यों हुआ आनंद किशोर का ट्रांसफर ?


आनंद किशोर को अचानक हटाए जाने की वजह रिशु श्री टेंडर घोटाले को बताया जा रहा है। पूछताछ के दौरान रिशु श्री ने बिहार के कई अधिकारियों के नाम बताए थे। करोड़ों रुपये के इस टेंडर घोटाले और इससे जुड़े गैर-कानूनी लेन-देन की जांच में आनंद किशोर का नाम भी सामने आया है। इसके अलावा, इस मामले में गिरफ्तार किए गए मुमुक्षु चौधरी ने पूछताछ के दौरान बताया कि उसने कथित तौर पर आनंद किशोर को 25 लाख रुपये की रिश्वत देकर म्युनिसिपल कमिश्नर का पद हासिल किया था।

बने रहेंगे पर्यावरण विभाग के ACS

आनंद किशोर को नीतीश कुमार के करीबी कुछ चुनिंदाअधिकारियों में गिना जाता था। इसी राजनीतिक रसूख की वजह से, समय-समय पर कार्यकाल बढ़ाए जाने के कारण वे एक दशक तक अपने पद पर बने रहे। हालांकि सरकार ने उन्हें बिहार बोर्ड के चेयरमैन पद से हटा दिया है, लेकिन प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने के लिए वे फिलहाल पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) के तौर पर काम करते रहेंगे।

डॉ. त्यागराजन को मिली बिहार बोर्ड की जिम्मेदारी

आनंद किशोर के हटने के बाद अब बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड की कमान डॉ. त्यागराजन एस.एम. को सौंपी गई है। वे 2011 बैच के IAS अधिकारी हैं और अपनी सख्ती और बेदाग़ छवि के लिए जाने जाते हैं। इससे पहले, डॉ. त्यागराजन पटना के जिलाधिकारी के पद पर तैनात थे और उससे पहले वे गया ज़िले में भी इसी पद पर थे।