11 सितंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

NASA के टेलिस्कोप ने पकड़ी ब्लैक होल की ‘चोरी’, अपना ही छोड़ा ईंधन निगलते हुए लाइव वीडियो आया सामने

NASA Telescope Black Hole unique Scene: नासा के जेम्स वेब कैमरे की होश उड़ाने वाली खोज में ब्रह्मांड की सबसे बड़ी रीसाइक्लिंग फैक्ट्री के बारे में पता चला है,इसके अनुसार ब्लैक होल अपना छोड़ा धुआं ठंडा कर के अपना भोजन बना रहा है।
8 min read
Google source verification

भारत

image

MI Zahir

image

एम आई जाहिर

Jul 18, 2026

NASA Black Hole News,Nasa News

नासा के टेलीस्कोप ने ठंडी होती गैस की एक धारा का पता लगाया है जो घूमती हुई डिस्क में गिर रही है, यह डिस्क एक सुपरमैसिव ब्लैक होल को फीड करती है। ( कंटेंट: नासा, डिजाइन: पत्रिका)

NASA James Webb Telescope Captured Supermassive Black Hole Devouring Fuel : ब्रह्मांड की गहराइयों में एक ऐसा रहस्य छिपा हुआ है जो दशकों से इंसानी समझ को चुनौती दे रहा है। हम बात कर रहे हैं सुपरमैसिव ब्लैक होल यानि महाविशाल ब्लैक होल की। ये ब्रह्मांड के वो दानव हैं जो अपने सामने आने वाली हर चीज, यहां तक कि प्रकाश को भी निगल जाते हैं। लेकिन वैज्ञानिकों के सामने हमेशा से एक बड़ा सवाल था, अगर ये ब्लैक होल सब कुछ खत्म कर देते हैं, तो इन्हें लगातार बढ़ने के लिए ईंधन (गैस और धूल) कहां से मिलता है? नासा के सबसे शक्तिशाली अंतरिक्ष कैमरे, जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप ने इस रहस्य से पर्दा उठा दिया है।

गैस की विशालकाय पाइपलाइन इस ब्लैक होल के मुंह तक जा रही

जेम्स वेब ने पृथ्वी से करोड़ों प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक आकाशगंगा के केंद्र में चल रहे एक महाविशाल ब्लैक होल की ऐसी तस्वीरें ली हैं, जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। कैमरे में साफ देखा गया है कि गैस की एक विशालकाय पाइपलाइन इस ब्लैक होल के मुंह तक जा रही है, जिससे यह लगातार ईंधन निगल रहा है। इस घटनाक्रम का लाइव वीडियो सामने आया है।

नासा के वेब टेलीस्कोप से सुपरमैसिव ब्लैक होल की दुनिया का नजारा। ( कंटेंट: नासा, विजुअल डिजाइन: Gemini AI)

NGC 4696: उस गैलेक्टिक चक्रव्यूह की कहानी, जहां यह घटना घटी

इस ऐतिहासिक खोज को समझने के लिए हमें सबसे पहले उस जगह का सफर करना होगा, जहां यह अद्भुत घटना घट रही है। वैज्ञानिकों ने जेम्स वेब टेलिस्कोप का रुख सेंटोरस गैलेक्सी क्लस्टर की तरफ किया था। यह हमारी पृथ्वी से लगभग 145 मिलियन (यानि 14.5 करोड़) प्रकाश वर्ष दूर अंतरिक्ष में स्थित आकाशगंगाओं का एक बहुत बड़ा और घना समूह है।

सुपरमैसिव ब्लैक होल को जेम्स वेब ने अपनी नजरों से ट्रैक किया

इस क्लस्टर के बिल्कुल बीचों-बीच एक विशालकाय आकाशगंगा मौजूद है, जिसे खगोलविदों की भाषा में एनजीटी 4696 नाम दिया गया है। यह आकाशगंगा ब्रह्मांड के उन चुनिंदा स्थानों में से एक है, जहां ब्लैक होल और उसके आसपास के वातावरण के बीच सबसे हिंसक और सक्रिय मुकाबला चलता रहता है। इसी आकाशगंगा के सीने में छिपा हुआ है, वह सुपरमैसिव ब्लैक होल, जिसे जेम्स वेब ने अपनी खास नजरों से ट्रैक किया है। इस शोध का नेतृत्व यूनिवर्सिटी डी मॉन्ट्रियल की अंतरराष्ट्रीय टीम ने किया, जिसमें मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस पूरी खोज की विस्तृत रिपोर्ट वैज्ञानिक पत्रिका द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स के अंक में प्रकाशित की गई है।

क्या होता है 'एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लियस' (AGN)?

भौतिकी के नियमों के अनुसार, एक ब्लैक होल अपने आप में पूरी तरह से काला होता है, क्योंकि उसका गुरुत्वाकर्षण इतना तीव्र होता है कि वह प्रकाश को भी बाहर नहीं आने देता। तो फिर जेम्स वेब टेलिस्कोप ने इसकी तस्वीरें कैसे लीं? इसका जवाब एक्टिव गैलेक्टिक न्युक्लियस (AGN) की प्रक्रिया में छुपा हुआ है।

गैस, धूल और मलबे का जमाव होने लगता है

जब किसी आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद महाविशाल ब्लैक होल के आसपास भारी मात्रा में गैस, धूल और मलबे का जमाव होने लगता है, तो वह मलबा ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण के कारण ज्यादा तेज गति से उसके चक्कर काटने लगता है। इस चक्रवाती गति के कारण मलबे के कण आपस में टकराते हैं और उनमें भीषण घर्षण पैदा होता है।

अरबों डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो जाता है पूरा इलाका

इस घर्षण की वजह से वह पूरा इलाका अरबों डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो जाता है। इतनी भयानक गर्मी के कारण वहां से अत्यधिक चमकदार रोशनी, एक्स-रे और घातक विकिरण निकलने लगते हैं। अंतरिक्ष के इस सबसे चमकदार और एनर्जेटिक पार्ट को ही वैज्ञानिक भाषा में 'एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लियस' या एजीएन कहा जाता है। यही वह चमक है जिसे जेम्स वेब टेलिस्कोप के कैमरों ने पकड़ा है।

ब्लैक होल एक्टिव होता है, तो वह शक्तिशाली इंजन की तरह काम करता है

दशकों पुरानी वो पहेली, जिसने वैज्ञानिकों की नींद उड़ा रखी थी, खगोल विज्ञान में पिछले कई दशकों से एक विरोधाभास बना हुआ था। वैज्ञानिक जानते थे कि जब एक ब्लैक होल एक्टिव होता है, तो वह एक बेहद शक्तिशाली इंजन की तरह काम करता है। वह अपने उत्तर और दक्षिण ध्रुवों से ऊर्जा की दो विशालकाय और बेहद गर्म धाराएं छोड़ता है, जिन्हें कॉस्मिक जेट्स कहा जाता है।

गैस जब तक ठंडी नहीं होगी, तब तक वह ब्लैक होल की तरफ नहीं गिरेगी

ये जेट इतने पावरफुल होते हैं कि पूरी आकाशगंगा को पार कर के लाखों प्रकाश वर्ष दूर अंतरिक्ष में फैल जाते हैं। अब पहेली यह थी कि ये जेट अपने आसपास की सभी गैसों को अत्यधिक गर्म कर देते हैं। विज्ञान का नियम कहता है कि गैस जब तक ठंडी नहीं होगी, तब तक वह भारी होकर नीचे (यानि ब्लैक होल की तरफ) नहीं गिरेगी।

ब्लैक होल की गतिविधियां नासा के जेम्स वेब टेलिस्कोप कैमरे की आंख से । ( कंटेंट: नासा, विजुअल डिजाइन: ChatGPT)

खगोलविदों की पुरानी कशमकश

अगर ब्लैक होल से निकलने वाले जेट आसपास की गैस को इतना गर्म कर देते हैं कि वह दूर छिटक जाती है, तो फिर ब्लैक होल के पास आने वाली गैस का रास्ता बंद हो जाना चाहिए। इसका मतलब यह हुआ कि ब्लैक होल को अपना भोजन मिलना बंद हो जाना चाहिए और उसे शांत हो जाना चाहिए। लेकिन हकीकत में ऐसा होता नहीं था, ब्लैक होल लगातार करोड़ों सालों तक ईंधन खाते रहते थे। वैज्ञानिक हैरान थे कि यह भोजन आ कहां से रहा है?

सुपरमैसिव ब्लैक होल और आकाशगंगाओं का अंतर्संबंध


लगभग हर बड़ी आकाशगंगा के केंद्र में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल (SMBH) होता है, जिसका द्रव्यमान हमारे सूर्य से लाखों या अरबों गुना अधिक हो सकता है। वैज्ञानिक तथ्य है कि एक ब्लैक होल स्वयं प्रकाश उत्सर्जित नहीं करता है। लेकिन जब भारी मात्रा में गैस और धूल इसकी ओर गिरती है, तो अत्यधिक घर्षण और गुरुत्वाकर्षण के कारण वह सामग्री भीषण रूप से गर्म हो जाती है। इससे एक अत्यंत चमकीला और ऊर्जावान क्षेत्र बनता है, जिसे खगोल वैज्ञानिक एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लियस (AGN) कहते हैं।

जेम्स वेब ने खोज निकाला ब्लैक होल का 'फीडबैक लूप'

जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप ने लगातार आठ घंटे तक एएजीसी 4696 आकाशगंगा के केंद्र को निहारा। इस काम के लिए टेलिस्कोप के सबसे आधुनिक उपकरण नियर-इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोग्राफ का इस्तेमाल किया गया। इस उपकरण की खासियत यह है कि यह धूल की मोटी परतों को चीर कर इंफ्रारेड लाइट के जरिये देख सकता है और यह भी बता सकता है कि यह अंतरिक्ष में गैस किस रफ्तार से और किस दिशा में बह रही है। जेम्स वेब की तस्वीरों ने जो दिखाया, उसने इस पहेली को हमेशा के लिए सुलझा दिया। वैज्ञानिकों ने पाया कि यह पूरी प्रक्रिया एक सेल्फ रैगुलेटेड साइकिल यानि एक फीडबैक लूप पर काम करती है।

वैज्ञानिक फिलामेंट : ईंधन का गर्म हो जाना

ब्लैक होल अपनी सक्रियता से जेट निकालता है और गैलेक्टिक वातावरण की गैस को गर्म करता है। यह गर्म गैस जब दूर जाती है, तो धीरे-धीरे ठंडी होने लगती है। ठंडी होने पर यह गैस सिकुड़ कर पतली और लंबी धागे जैसी संरचनाओं में बदल जाती है, जिन्हें वैज्ञानिक फिलामेंट कहते हैं।

पाइपलाइन का निर्माण

ये फिलामेंट्स अंतरिक्ष में नदियों या पाइपलाइनों की तरह काम करते हैं। ये ठंडी गैस को वापस आकाशगंगा के केंद्र की तरफ मोड़ देते हैं। यह ठंडी गैस वापस ब्लैक होल के पास पहुंचती है, जिससे ब्लैक होल को नया ईंधन मिलता है और चक्र फिर से शुरू हो जाता है।

डेटा और आंकड़ों की जुबानी: कितनी भयानक है ब्लैक होल की रफ्तार?

जेम्स वेब टेलिस्कोप से प्राप्त डेटा के आधार पर वैज्ञानिकों ने जो गणितीय आंकड़े तैयार किए हैं, वे किसी भी इंसान के रोंगटे खड़े करने के लिए काफी हैं। इसे इस चार्ट से समझा जा सकता है:

ब्लैक होल के चारों ओर घूम रही गैस डिस्क की रफ्तार 600 किमी प्रति सेकंड

इस चार्ट से यह बात साफ है कि ब्लैक होल के चारों ओर जो गैस की डिस्क घूम रही है, उसकी रफ्तार 600 किलोमीटर प्रति सेकंड है। अगर इस रफ्तार से कोई वस्तु पृथ्वी पर चले, तो वह एक सेकंड से भी कम समय में कश्मीर से कन्याकुमारी तक की दूरी तय कर लेगी!

चुंबकीय शक्तियां और 'S-शेप' की रहस्यमयी डिस्क

जेम्स वेब की तस्वीरों का जब गहन विश्लेषण किया गया, तो वैज्ञानिकों को ब्लैक होल के बिल्कुल पास एक अनोखी 'एस-शेप की संरचना दिखाई दी। यह वास्तव में गैस की एक विशालकाय घूमती हुई एक्रिशन डिस्क है, जो लगभग 800 प्रकाश वर्ष चौड़ी है। इस डिस्क की सबसे खास बात यह थी कि यह बाहर से आ रहे एक बेहद लंबे और ठंडे गैस के फिलामेंट से सीधे तौर पर जुड़ी हुई थी। जैसे किसी बड़े बांध से पानी निकालने के लिए नहरें बनाई जाती हैं, ठीक वैसे ही यह फिलामेंट अंतरिक्ष में बहती हुई एक नहर की तरह सीधे इस 'S-आकार' की डिस्क में जाकर मिल रहा था।

जेम्स वेब की तस्वीरों में इस थ्योरी को साक्षात सच होते हुए देखना एक जादुई अनुभव जैसा

मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के भौतिकी और खगोल विज्ञान विभाग के प्रोफेसर मार्क वोइट ने बताया ' हमारी सैद्धांतिक गणनाओं और कंप्यूटर मॉडल्स ने बहुत पहले यह अनुमान लगाया था कि अंतरिक्ष में मौजूद पावरफुल मैग्नेटिक फील्ड्स इन ठंडी गैसों की घूर्णन गति को धीमा कर देते हैं। जब गैस की घूमने की रफ्तार कम होती है, तभी गुरुत्वाकर्षण उसे सीधे ब्लैक होल के केंद्र की तरफ खींच पाता है। जेम्स वेब की तस्वीरों में इस थ्योरी को साक्षात सच होते हुए देखना एक जादुई अनुभव जैसा है।'

सुपरकंप्यूटर के सिमुलेशन ने भी जेडब्ल्यूएसटी के दावों पर लगाई मुहर

वैज्ञानिक किसी भी खोज को तब तक पूरी तरह सच नहीं मानते, जब तक कि उसे प्रयोगशाला में या गणितीय सिमुलेशन के जरिये दोबारा दोहराया न जा सके। इस मामले में भी शोधकर्ताओं ने दुनिया के सबसे एडवांस सुपरकंप्यूटरों का इस्तेमाल कर के डिजिटल ब्रह्मांड का निर्माण किया।

गैस, गुरुत्वाकर्षण, चुंबकीय क्षेत्र और ब्लैक होल के जेट्स के बीच रिएक्शन

उन्होंने कंप्यूटर सिमुलेशन में वही भौतिक परिस्थितियां पैदा कीं ,जो एनजीटी 4696 आकाशगंगा में मौजूद हैं। कंप्यूटर के अंदर गैस, गुरुत्वाकर्षण, चुंबकीय क्षेत्र और ब्लैक होल के जेट्स के बीच रिएक्शन कराया गया।

साइंस के लिहाज से ये नतीजा चौंकाने वाला था

कंप्यूटर सिमुलेशन के अंदर भी गैस ठीक उसी तरह ठंडी हुई, उसी तरह पतले फिलामेंट्स में बदली और उसी 'एस-शेप' की डिस्क में जाकर गिरी, जैसा जेम्स वेब टेलिस्कोप ने अपनी तस्वीरों में असलियत में रिकॉर्ड किया था। वास्तविक अवलोकन और कंप्यूटर सिमुलेशन के बीच इस सटीक तालमेल ने इस थ्योरी को 100% साबित कर दिया है कि ब्लैक होल अपने ही ईंधन को रीसायकल कर के करोड़ों बरसों तक जिंदा रहते हैं।

सुपरमैसिव ब्लैक होल के इस घटनाक्रम पर खगोलविदों के बयान

"यह जानकारी पचाना अभी बाकी है," इस अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट में शामिल मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठित प्रोफेसर मेगन डोनह्यू ने इस खोज पर उत्साह व्यक्त करते हुए कहा: "जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप हमें हर सेकंड हजारों नए तथ्य, तस्वीरें और वैज्ञानिक माप दे रहा है। ईमानदारी से कहूं तो, हमारे पास डेटा का इतना बड़ा भंडार जमा हो गया है कि इसे पूरी तरह से पचाना और समझना अभी बाकी है। हम सभी वैज्ञानिक मिल कर इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि ये ब्लैक होल अपनी मूल आकाशगंगाओं के विकास को किस हद तक प्रभावित करते हैं।'

बहरहाल मानव इतिहास और ब्रह्मांडीय समझ के लिए इसके क्या मायने हैं?

जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप की यह खोज सिर्फ इस बात का जवाब नहीं है कि ब्लैक होल खाना कैसे खाते हैं, बल्कि यह इस बात का भी सुबूत है कि ब्रह्मांड में कोई भी चीज बेकार नहीं जाती। जिसे हम ब्लैक होल का विनाशकारी रूप समझते थे, वह वास्तव में अपनी आकाशगंगा के वातावरण को संतुलित रखने का एक स्व-नियमित तरीका है।

भौतिकी के बेहद खूबसूरत और अनुशासित नियमों का पालन

ब्लैक होल से गैस को गर्म करना, फिर उसका ठंडा होकर फिलामेंट बनना और वापस ब्लैक होल में समा जाना यह साबित करता है कि ब्रह्मांड के सबसे हिंसक कोने भी भौतिकी के बेहद खूबसूरत और अनुशासित नियमों का पालन करते हैं। आने वाले समय में जेम्स वेब के ये डेटा हमें यह समझने में मदद करेंगे कि हमारी खुद की आकाशगंगा, मिल्की-वे का भविष्य कैसा होने वाला है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन ऑब्ज़र्वेशन से यह पुष्टि हो सकती है कि ये विशालकाय खगोलीय पिंड फ़ीडिंग, हीटिंग, कूलिंग और फिर से फ़ीडिंग का खुद को रेगुलेट करने वाला सर्कल कैसे बनाए रखते हैं।

बड़ी खबरें

View All

Patrika+

ट्रेंडिंग