दवा के निर्यात पर बोले ओवैसी- जल्दबाजी में फैसला लेना सरकार का ट्रेडमार्क

  • हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात को खोले जाने पर दी प्रतिक्रिया।
  • अमरीकी धमकी के बाद भारत ने हटा दिया है निर्यात से प्रतिबंध।
  • मलेरिया रोधी दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन कथितरूप से कोरोना में कारगर।

हैदराबाद। कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे के बीच अमरीका की धमकी के बाद मलेरिया के लिए काम आने वाली दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात को भारत द्वारा अस्थायी रूप लाइसेंस दिए जाने के फैसले की आलोचना शुरू हो गई है।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लीमीन (AIMIM) के प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को केंद्र सरकार पर हमला बोला है।

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मीडिया से बातचीत में ओवैसी ने कहा, "यह दवा हैदराबाद और औरंगाबाद के बड़े मेडिकल स्टोरों पर भी बहुत मुश्किल से उपलब्ध है और मोदी सरकार ने यह फैसला ले लिया। मुझे उम्मीद है कि सरकार ने इस दवा की हिंदुस्तानियों के लिए उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया होगा, क्या सरकार ने विशेषज्ञों से बातचीत की थी या यह उनके ट्रेडमार्क वाला जल्दबाजी में लिया गया निर्णय है।"

दरअसल अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत को धमकी दी थी कि अगर यह हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात से पाबंदी नहीं हटाता, तो उसे संभावित बदले के लिए तैयार रहना होगा।

इसके बाद भारत ने पैरासिटामॉल और मलेरिया रोधी दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के पर्याप्त मात्रा में निर्यात का अस्थायी लाइसेंस दे दिया था। इनमें वो देश शामिल हैं जिनमें कोरोना वायरस महामारी से हालात बहुत बुरे हो चुके हैं।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव द्वारा जारी एक बयान में कहा गया था, "इस महामारी के मानवीय पक्षों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है कि भारत हमारे उन पड़ोसी मुल्कों में पैरासिटामॉल और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को पर्याप्त मात्रा में निर्यात करेगा जो हमारे ऊपर निर्भर हैं।"

इससे पहले मंगलवार को ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने कहा था कि केंद्र सरकार ने बिना योजना बनाए लॉकडाउन को लागू कर दिया। इतना ही नहीं COVID-19 9 और लॉकडाउन से उत्पन्न स्थितियों से नौसिखियों की तरह निपटने की कोशिश की।

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उन्होंने बीजेपी की आलोचना करते हुए कहा था कि जिम्मेदारी से बचने के लिए केवल मिलाजुला प्रयास किया जा रहा है। भाजपा के प्रचारकों को मालूम होना चाहिए कि वे व्हॉट्सऐप फॉरवर्ड के ज़रिए कोरोना वायरस को नहीं हरा सकते। इस मामले में मुस्लिमों को बलि का बकरा बनाना भी कोरोना वायरस की दवा नहीं है। न ही यह पर्याप्त कोरोना टेस्टिंग का विकल्प हो सकता है।

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अमित कुमार बाजपेयी
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