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यूपी चुनाव से पहले एनडीए में सीटों का गणित गरमाया

सहयोगी दल स्थानीय सामाजिक समीकरणों के साथ 2024 लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को आधार बनाकर पिछली बार से ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं। भाजपा भी सहयोगियों की दावेदारी का सीट-दर-सीट आकलन कर रही है।
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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर अंदरखाने कवायद शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक सहयोगी दल स्थानीय सामाजिक समीकरणों के साथ 2024 लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को आधार बनाकर पिछली बार से ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं। भाजपा भी सहयोगियों की दावेदारी का सीट-दर-सीट आकलन कर रही है। इसके बाद औपचारिक बातचीत को आगे बढ़ाया जाएगा।

निषाद पार्टी अध्यक्ष संजय निषाद ने ज्यादा सीटों की मांग सार्वजनिक कर दी है। उनकी मांग खासकर उन सीटों को लेकर है, जहां पिछले चुनावों में भाजपा कमजोर रही। सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर भी ज्यादा सीटों की दावेदारी कर रहे हैं। अपना दल (एस) और आरएलडी भी अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में बेहतर हिस्सेदारी चाहेंगे।

2022 में सीट शेयरिंग

दल 2022 में गठबंधन लड़ी सीटें जीती सीटें
भाजपा एनडीए 376255
अपना दल (एस) एनडीए 17 12
निषाद पार्टी एनडीए 10 6
सुभासपा सपा गठबंधन 19 6
आरएलडी सपा गठबंधन 33 8

2022 में भाजपा-अपना दल-निषाद पार्टी गठबंधन ने कुल 273 सीटें जीती थीं। सुभासपा और आरएलडी तब सपा गठबंधन में थे। अब दोनों दल एनडीए में हैं। ऐसे में 2027 का सीट गणित 2022 से अलग होगा।

2024 का प्रदर्शन भी बनेगा आधार

सहयोगी दल 2024 लोकसभा चुनाव के आंकड़ों को भी अपनी दावेदारी के आधार के रूप में रख रहे हैं। उस चुनाव में आरएलडी ने दोनों सीटें जीतीं, अपना दल (एस) ने एक सीट जीती, जबकि सुभासपा ने एक सीट पर चुनाव लड़ा। निषाद पार्टी के उम्मीदवार दो सीटों पर भाजपा के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरे थे।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक पार्टी का आकलन केवल सहयोगियों की मांग पर नहीं, बल्कि प्रत्येक सीट पर गठबंधन की संयुक्त ताकत के आधार पर होगा। स्थानीय संगठन, पिछले विधानसभा और लोकसभा नतीजे, सामाजिक समीकरण और संभावित उम्मीदवार की स्थिति देखी जाएगी।

कुछ सीटें सीधे, कुछ पर कमल

सूत्रों के मुताबिक भाजपा कुछ सीटें सहयोगी दलों को सीधे देने के साथ कुछ सीटों पर सहयोगी दलों के मजबूत चेहरों को भाजपा के चुनाव चिह्न कमल पर उतारने की रणनीति पर भी काम कर रही है। इससे सीटों की संख्या और गठबंधन के मजबूत उम्मीदवारों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश होगी।

भाजपा के सामने चुनौती अपने कार्यकर्ताओं की दावेदारी और सहयोगियों की मांग के बीच संतुलन बनाने की भी होगी। वहीं सहयोगी दल अपने सामाजिक आधार के अनुरूप अधिक सीटें चाहते हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में सीट-दर-सीट ताकत का आकलन ही एनडीए के अंतिम सीट शेयरिंग फॉर्मूले की दिशा तय करेगा।