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शिवसेना का आरोप, वामपंथी देशों की तरह प्रधानमंत्री मोदी कर रहे एकतरफा संवाद

शिवसेना ने सामना में कहा कि पिछले चार वर्षो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भी संवाददाता सम्मेलन आयोजित नहीं किया है, लेकिन अपने मन की बात एक रेडियो कार्यक्रम के जरिए जाहिर करते हैं।
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Chandra Prakash Chourasia

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Updated: 13 Aug 2018, 4:53 PM IST

modi

शिवसेना का आरोप, वामपंथी देशों की तरह प्रधानमंत्री मोदी कर रहे एकतरफा संवाद

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक साक्षात्कार पर एनडीए की सहयोगी शिवसेना ने तीखा हमला किया है। शिवसेना आरोप लगाया है कि पीएमओ पत्रकारों से प्रश्न मंगवाता है, जिसका लिखित जवाब दिया जाता है। कई इसे एक साक्षात्कार के रूप में बताते हैं। दूसरे शब्दों में यह प्रोपोगंडा है।

पीएम मोदी कर रहे एकतरफा संवाद

शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'दोपहर का सामना' में कहा कि अगर पीएम की पत्रकार से सीधी बातचीत हुई होती तो उसमें कई प्रकार के प्रश्न पूछे गए होते और साक्षात्कार करने वाला किसी भी तरह के 'फर्जी बयान' को पकड़ लिया होता। पार्टी ने पीएम पर एकतरफा संवाद करने का आरोप लगाया है। सामना में कहा है कि एकतरफा संवाद चीन, रूस और वामपंथी देशों में होता है लेकिन ये सरकार अब भारत में भी ऐसा करना चाह रही है।

70 लाख नौकरियों वादा, मिले 45 लाख

सामना में कहा गया है कि मौजूदा प्रधानमंत्री इस परंपरा को समाप्त कर देना चाहते हैं। उन्हें जो उचित लगता है, उसी का जवाब देते हैं और साक्षात्कार को उसी हिसाब से प्रकाशित किया जाता है। शिवसेना ने कहा कि प्रधानमंत्री ने साक्षात्कार में कहा कि एक वर्ष में 70 लाख नौकरियां सृजत हुईं, जिसमें सितंबर 2017 और अप्रैल 2018 के बीच 45 लाख नौकरियों का सृजन हुआ।

यह भी पढ़ें: राज्यसभा की कार्यवाही से हटी पीएम मोदी की टिप्पणी, बीके हरिप्रसाद पर दिया था असंसदीय बयान

नौकरी होती तो सड़क पर नहीं आते युवा

पार्टी ने कहा है कि अगर यह साक्षात्कार आमने-सामने होता तो, पत्रकार को यह पूछने का अवसर मिल सकता था कि किस क्षेत्र में इन नौकरियों का सृजन हुआ है और कैसे इस दावे की पुष्टि हुई है। शिवसेना ने कहा कि अगर इतनी नौकरियों का सृजन हो रहा है, तो क्यों बेरोजगार युवा बेरोजगारी और नौकरियों में आरक्षण को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

मन की बात पर भी किया हमला

सामना के अनुसार कि पिछले चार वर्षो में प्रधानमंत्री ने एक भी संवाददाता सम्मेलन आयोजित नहीं किया है, लेकिन अपने मन की बात एक रेडियो कार्यक्रम के जरिए जाहिर करते हैं, जिसके बारे में मीडिया रिपोर्ट करता है। लेकिन इससे मोदी को कोई प्रतिष्ठा नहीं मिली। पार्टी ने कहा कि 2014 चुनाव से पहले, मोदी मीडिया के दोस्त थे, लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद, वह एक पिंजरे में बंद हो गए हैं..अगर यह चलता रहा, तो कई पत्रकारों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ सकती हैं।

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