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ममता बनर्जी पर सुब्रह्मण्‍यम स्‍वामी का बड़ा हमला, पश्चिम बंगाल में लगे राष्‍ट्रपति शासन

पश्चिम बंगाल में अराजकता कि स्थिति है और राष्‍ट्रपति शासन लगाने का उचित आधार बनता है।
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Dhirendra Kumar Mishra

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Updated: 1 Aug 2018, 1:41 PM IST

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नई दिल्‍ली। एनआरसी के मुद्दे पर सीएम ममता बनर्जी के गृह युद्ध वाले बयान को भाजपा के वरिष्‍ठ नेता सुब्रह्मण्‍यम स्‍वामी ने गंभीरता से लिया है। उन्‍होंने ममता पर पलटवार करते हुए कहा है कि उनकी ये हिम्‍मत कैसे हुई कि वो इस मुद्दे पर गृह युद्ध की धमकी केंद्र सरकार को दें। यह सीएम के पद के विशेषाधिकारों को घोर उल्‍लंघन है। इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि वो पश्चिम बंगाल में राष्‍ट्रपति शासन लागू करे। वैसे भी पश्चित बंगाल में अराजकता कि स्थिति है और राष्‍ट्रपति शासन लगाने का उचित आधार बनता है।

भारत कोई धर्मशाला नहीं
भाजपा के वरिष्‍ठ और अपने गंभीर बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है कि यहां पर कोई भी किसी भी देश से आकर बस जाए। अभी तो असम में एनआरसी लागू हुआ है। अगर हमारी सरकार पश्चिम बंगाल में आएगी तो हम वहां पर भी एनआरसी लागू करेंगे।

भड़काऊ बयान
स्‍वामी ने ममता की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि वह शासन और प्रशासन के मामले में अभी अनुभवहीन राजनेता की तरह बातें करती हैं। गृह युद्ध अराजकता की स्थिति में होती है। भारत में प्रशासन मजबूत है। इसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता है। इसलिए कोई कारण नहीं है कि देश के संवैधानिक पदों पर बैठा व्‍यक्ति इस तरह की बात करे। उन्‍होंने कहा कि बांग्‍लादेशी हमारे देश के नागरिक नहीं है। वो गैर कानूनी तरीके से भारत में घुस आए हैं। एनआरसी प्रक्रिया के तहत 40 लाख लोगों को अवैध घोषित किया गया है। इसलिए न तो नैतिक और न ही राजनीतिक आधार गृह युद्ध की बात करने का बनता है।

सियासी भूचाल
आपको बता दें कि असम में दो दिन पहले एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट आने के बाद से देश में सियासी भूचाल की स्थिति है। इस बीच ड्राफ्ट में अवैध करार दिए गए 40 लाख बांग्‍लादेशी घुसपैठियों का बायोमेट्रिक्‍स डेटा बैंक बनाने की सूचना केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को दी है। वहीं शीर्ष अदालत की संवैधानिक पीठ ने केंद्र से कहा कि जिन लोगों का नाम एनआरसी के अंतिम ड्राफ्ट में शामिल नहीं हैं उनके खिलाफ सरकार फिलहाल दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेंगी। न ही उन्‍हें अभी बांग्‍लादेशी करार दे सकते हैं। ऐसा इसलिए कि एनआरसी अभी केवल ड्राफ्ट है। जब तक शीर्ष अदालत इस पर अंतिम फैसला नहीं सुना देती तब तक सरकार उन्‍हें केवल अवैध मान सकती है।