
Credit- Instagram/Abhijeet deepke and Diljeey dosanjh
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 30 अक्टूबर 2026 को हुए दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट ने एक पुरानी बहस को फिर से हवा दे दी। यह विवाद जून 2026 में शुरू हुआ था, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने NEET पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान दिलजीत की चुप्पी पर सवाल उठाया था।
दिलजीत ने 30 अक्टूबर को अपने दिल्ली शो में इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मैं आप सभी से प्यार करता हूं, क्योंकि मैं एक कलाकार हूं, भाई। मैं चुप हूं, तो मुझे चुप ही रहने दो। मैं आप सभी का समर्थन करता हूं। लेकिन पंजाबियों को यह मत सिखाओ कि लड़ाइयां कैसे लड़ी जाती हैं।”
उन्होंने अपनी फिल्म ‘सतलुज’ का भी बचाव किया, जो मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा पर आधारित है, और बताया कि इस फिल्म के लिए उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया है।
दिलजीत के इस बयान के बाद CJP के अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि जून में उनके प्रदर्शन के दौरान दिलजीत का वह बयान उन्हें व्यक्तिगत रूप से दुख पहुंचा गया था, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं था कि उनके मन में दिलजीत के लिए कोई दुश्मनी थी। उन्होंने कहा कि वे हमेशा दिलजीत को ऐसे व्यक्ति के रूप में देखते रहे हैं, जो मुद्दों के लिए आवाज उठाते हैं।
दिपके ने यह भी बताया कि वे मई में शिकागो में दिलजीत के एक कॉन्सर्ट में गए थे - न केवल उनके संगीत के लिए, बल्कि उनके व्यक्तित्व और जड़ों से जुड़े रहने के अंदाज के लिए। उन्होंने लिखा कि उनकी हिम्मत, सच्चाई और वैश्विक मंच पर भारत को ले जाने की क्षमता की उन्होंने हमेशा प्रशंसा की है। इसलिए दिलजीत का बयान उन्हें इसलिए भी दुखी कर गया, क्योंकि उन्होंने दिलजीत को बहुत ऊंचे स्थान पर रखा था।
पोस्ट के अंत में दिपके ने दिलजीत को ‘पाजी’ कहकर संबोधित करते हुए लिखा, “बाकी पाजी, छोटे भाई की तरह समझकर इस बात को यहीं खत्म कर दीजिए।” उन्होंने पंजाबी गीत की पंक्ति भी उद्धृत की: “गबरू ता वैरी नूं वी मिठा बोलदा, नी तू ता फेर जट्ट दा प्यार गोरीए।”
यह विवाद एक कलाकार और एक राजनीतिक आंदोलन के बीच जिम्मेदारी और दूरी की सीमा पर सवाल खड़ा करता है। दिलजीत ने स्पष्ट किया कि वह अपनी कला और दर्शकों से जुड़ाव में विश्वास रखते हैं, लेकिन राजनीतिक आंदोलनों में शामिल होना उनकी प्राथमिकता नहीं है। वहीं, दिपके ने यह जताया कि लोकप्रिय हस्तियों का सामाजिक मुद्दों पर बोलना महत्वपूर्ण होता है, और उनकी चुप्पी से निराशा हुई। लेकिन अंत में उन्होंने सौहार्द बनाए रखने की कोशिश की।
यह मामला दर्शाता है कि कलाकारों की भूमिका केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती; जब वे चुप रहते हैं, तो उनके समर्थक या आलोचक इसे एक संदेश के रूप में लेते हैं। वहीं, राजनीतिक नेताओं को यह समझना होगा कि आलोचना के बावजूद सम्मान और प्रशंसा कायम रह सकती है — जैसा कि दिपके ने दिखाया।
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह विवाद यहीं थम जाएगा या आगे कोई और बयानबाजी होगी। लेकिन फिलहाल, दोनों पक्षों ने एक तरह से विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने का संकेत दिया है — दिलजीत ने अपनी बात रखी, और दिपके ने सम्मान और प्रशंसा के साथ जवाब दिया।
Updated on:
31 Oct 2026, 12:36 PM IST
Published on:
31 Oct 2026, 12:36 PM IST
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