
कोठरी में पढ़ाई करते हुए सरकारी स्कूल के बच्चे (पत्रिका फोटो)
Rajasthan Government School Issue: पारसोला (प्रतापगढ़): ग्राम पंचायत भरकुंडी के भंगाभट्ट गांव में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के 180 विद्यार्थी करीब डेढ़ साल से पुराने निजी भवन की छोटी कोठरी और खुले बरामदे में पढ़ने को मजबूर हैं। विद्यालय के लिए ग्रामीण जमीन देने को तैयार हैं और गोलछा ग्रुप माइंस की ओर से भवन निर्माण की घोषणा भी की जा चुकी है, लेकिन जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से नया भवन नहीं बन पा रहा है।
विद्यालय का पुराना भवन गोलछा ग्रुप माइंस के लीज क्षेत्र में आने के साथ ही आए दिन होने वाली हैवी ब्लास्टिंग के कारण जर्जर हो गया था। झालावाड़ की घटना के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने अगस्त 2025 में विद्यालय को वहां से हटाकर पुराने निजी भवन में स्थानांतरित कर दिया था। इसके बाद समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने आपसी सहमति से विद्यालय के लिए भंगाभट्ट बाईपास रोड और मेड़ी फला क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराने की पहल की।
प्रधानाध्यापक ने बताया कि पूर्व में जिला कलक्टर की ओर से विद्यालय के लिए जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन ग्रामीणों की सहमति नहीं बनने से मामला आगे नहीं बढ़ सका। अब जमीन देने वाले और भवन निर्माण कराने वाले दोनों तैयार हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी नहीं होने से अध्ययन-अध्यापन प्रभावित हो रहा है।
धरियावद तहसीलदार दीपिका कटारा ने बताया कि विद्यालय की जमीन के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
ग्रामीणों के अनुसार बाईपास रोड पर संचया, गुंडिया, वालिया, गोतिया और लालशंकर पुत्र हवजी मीणा अपनी पैतृक जमीन में से करीब तीन बीघा सामलात जमीन विद्यालय के लिए देने को तैयार हैं। इसके बावजूद पर्याप्त जमीन नहीं होने की बात कहते हुए अब तक स्वीकृति नहीं दी गई है, जिससे समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
वहीं, यहां के ग्रामीणों का कहना है कि उपलब्ध जमीन पर एएसडीसी गोलछा ग्रुप माइंस की ओर से सभी सुविधाओं से युक्त दस कक्षा-कक्षों का निर्माण कराने की घोषणा की गई है। ऐसे में अब प्रशासन से उम्मीद है कि विद्यार्थियों को कोठरी से बाहर निकाला जा सकेगा, जिससे उन्हें काफी राहत मिलेगी।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक ओमप्रकाश मीणा ने बताया कि विद्यालय की स्थापना वर्ष 1980 के दशक में हुई थी। वर्तमान में 180 विद्यार्थियों का नामांकन है और सात शिक्षक कार्यरत हैं। वर्तमान भवन में छोटे कमरे और खुले बरामदे में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। यहां विद्यालय के कमरों में पर्याप्त हवा और रोशनी की व्यवस्था नहीं होने से विद्यार्थियों और शिक्षकों को परेशानी हो रही है।
Updated on:
07 Oct 2026 03:55 pm
Published on:
07 Oct 2026 03:55 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
