
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के 7 आरोपियों को किया बरी, जनिए वजह
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए साक्ष्य और तथ्य न मिलने पर सात आरोपियों को एक साथ बरी कर दिया है। यह आदेश जस्टिस विवेक कुमार बिड़ला और जस्टिस विकास बुधवार की पीठ ने दी है। कोर्ट ने आगे इस बात को ध्यान में रखा कि प्रत्यक्षदर्शी के बयान में भौतिक विरोधाभास और विसंगतियां हैं। प्राथमिकी दर्ज करने में देरी हुई। इसके बाद तथ्य यह है कि सीडीआर विवरण मेल नहीं खाते या मृतक के साथ आरोपी की उपस्थिति को चिह्नित नहीं करते।
मामले में कोर्ट ने धरम देव यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2014) 5 एससीसी 509, धन राज व ढांड बनाम हरियाणा राज्य (2014) 6 एससीसी 745, और चंद्रपाल बनाम। छत्तीसगढ़ राज्य 2022 लाइव लॉ (एससी) 529 के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर भरोसा जताया। जब आरोपी और मृतक को आखिरी बार जीवित देखा गया था और जब मृतक मृत पाया गया था, इस बीच ज्यादा समय अंतराल है।
यह पूरा मामला वर्तमान मामले में शिकायतकर्ता जय प्रकाश ने 19 मई 2014 को पुलिस उप महानिरीक्षक बरेली के समक्ष एक लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें आरोप लगाया गया कि उसने मृतक तब्बासुम उर्फ मुन्नी के साथ विवाह किया और चूंकि उनका एक अंतरधार्मिक विवाह था। आरोपी गुट के महिला से विवाह करने पर रिश्तेदार निराश हो गए क्योंकि उनकी बेटी ने शिकायतकर्ता से शादी कर ली है। जो एक अलग धर्म का है।
Updated on:
14 Sep 2022, 4:03 PM IST
Published on:
14 Sep 2022, 4:03 PM IST
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