
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी बार काउंसिल को लेकर की बड़ी घोषणा, जानिए वजह
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से अनुरोध किया है कि राजस्व न्यायालयों में पीठासीन अधिकारियों की अनुपलब्धता या कमी के संबंध में स्वत: संज्ञान मामले में अदालत की सहायता करें। इस मामले में जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने बार काउंसिल ऑफ यूपी के सदस्यों को अगली तारीख 27 अप्रैल, 2022 को मामले में न्यायालय की सहायता करने के लिए कहा, जो लखनऊ के निवासी हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस प्रकार आदेश दिया क्योंकि न्यायालय को सूचित किया गया था कि बार काउंसिल ऑफ यूपी जो लखनऊ के रहने वाले हैं, उनमें अधिवक्ता अखिलेश अवस्थी, जय नारायण पांडे, प्रशांत सिंह अटल, प्रदीप सिंह, जानकी शरण पांडे, परेश मिश्रा और अब्दुल रज्जाक खान हैं। कोर्ट ने कार्यालय को निर्देश दिया कि वह बार काउंसिल ऑफ यूपी के उक्त सदस्यों को कोर्ट के अनुरोध से अवगत कराएं और उन्हें अदालत की सहायता के लिए मामले में अगली तारीख 27 अप्रैल, 2022 पर उपस्थित होने के लिए कहा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि राजस्व अदालतों में पीठासीन अधिकारियों की कमी के कारण राजस्व मामलों के निपटान में देरी होती है जिसमें म्यूटेशन, राजस्व रिकॉर्ड में सुधार और सीमांकन से संबंधित साधारण मामले भी शामिल हैं। अदालत ने टिप्पणी की, यह देखने की आवश्यकता नहीं है कि उत्परिवर्तन, राजस्व अभिलेखों में सुधार और सीमांकन आदि से संबंधित कोई भी विवाद, यदि लंबे समय तक अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो कभी-कभी गांव के जीवन में बहुत अराजक स्थिति पैदा हो जाती है जो अंततः कभी-कभी आपराधिक घटनाओं का रूप ले लेती है जिसमें हत्या जैसी घटनाएं शामिल हैं।
Updated on:
06 Apr 2022 12:36 pm
Published on:
06 Apr 2022 12:36 pm
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