इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहाकि, भारतीय संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की पूरी आजादी देता है पर इस अधिकार का प्रयोग किसी भी नागरिक के खिलाफ गाली-गलौज या अपमानजनक टिप्पणी करने तक नहीं है। यहां तक कि प्रधानमंत्री या अन्य मंत्रियों के खिलाफ भी नहीं है। मामले में याची ने सोशल मीडिया (फेसबुक) पर बेहद अत्यधिक अपमानजनक टिप्पणी की थी। इसी को आधार मानते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह सहित अन्य मंत्रियों को अपशब्द बोलने के मामले में जौनपुर के मीरागंज थाने में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से साफ-साफ इंकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहाकि, प्राथमिकी संज्ञेय अपराध को अंजाम देने का खुलासा करती है इसलिए प्राथमिकी में हस्तक्षेप करने के लिए कोई आधार नहीं बनता है।