
पंच और सरपंच के लिए साक्षर अभ्यर्थी नहीं मिल पा रहे
दुर्गा प्रसाद स्वर्णकार/रायगढ़. जिले में साक्षरता अभियान की पोल अब खुलकर सामने आ रही है। साक्षर भारत अभियान के तहत महापरीक्षा आयोजित कर 6 सालों में 92.1 प्रतिशत लोगों को साक्षर करने का दावा किया गया है, लेकिन उप चुनाव की स्थिति देखी जाए तो पंच और सरपंच के लिए साक्षर अभ्यर्थी नहीं मिल पा रहा है। इसके कारण से तीन उप चुनाव में खाली रहे पद अब चौथे उप चुनाव में भी नहीं भर पाएंगे।
जिले में रिक्त पड़े 31 पंच और 11 सरपंच पद पर उपचुनाव की तैयारी चल रही है। इसके लिए अधिसूचना का प्रकाशन पूर्ण कर लिया गया है। मतदाता सूची के प्रकाशन की तैयारी है, जिसके लिए दावा आपत्ति भी मंगा लिया गया है। शासन ने पंच और सरपंच दोनो के लिए शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता निर्धारित कर दी है, पंच सरपंच के लिए 5 वीं पास या फिर 8 वीं या फिर इसके समकक्ष कक्षा उत्तीर्ण किया होना चाहिए।
वर्तमान में होने वाले उप चुनाव में जिले के 18 पंच सरपंच के पद को शामिल नहीं किया गया है इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि कहीं पर आरक्षण आड़े आ रहा है तो कहीं पर शैक्षणिक योग्यता आड़े आ रही है। अधिकांश तौर पर देखा जाए तो शैक्षणिक योग्यता आड़े आने की बात कही जा रही है। आश्चर्य की बात तो यह है कि बरमकेला में साक्षर भारत अभियान इस कदर चला कि वहां का साक्षरता प्रतिशत 99.62 प्रतिशत पहुंच गया लेकिन बरमकेला के ही कई शिक्षित अभ्यर्थी नहीं मिल पा रहे हैं। इसीप्रकार अन्य विकासखंडों की स्थिति भी सामने आ रही है।
कई बार मिली शिकायत पर ध्यान नहीं
साक्षर भारत अभियान को लेकर कई बार शिकायत मिली लेकिन कभी भी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया जिसके कारण आज स्थिति यह निर्मित हो रही है कि शिक्षीत अभ्यर्थी पंच-सरपंच जैसे पदों के लिए नहीं मिल रहा है। जबकि इस अभियान केा ग्रामीण क्षेत्रों में ही फोकस किया गया था और वहीं ऐसी स्थिति है।
सिर्फ रायगढ़ ब्लाक में शेष
साक्षर भारत अभियान के आकड़ों पर गौर किया जाए तो मार्च 2018 शिक्षार्थी आंकलन के लिए पंजीकृत असाक्षरों के लक्ष्य पर गौर किया जाए तो जिले के सभी ब्लाक में जीरो है सिर्फ रायगढ़ ब्लाक में ही 24 शेष बताया जा रहा है। इसमें 3 महिला और 21 पुरुषों की संख्या बतायी जा रही है।
इनको नहीं कर रहे उपचुनाव में शामिल
कंचनपुर, संडा, बड़े नावापारा, करनपाली, हरदी, उधरा,सिंघनपुर, कपिस्दा, छोटे पंडरमुड़ा, केशला, पुरैना, टेमटेमा, किंध्रा ग्राम पंचायत में रिक्त पड़े पंच-सरपंच के पदों को उप चुनाव में शामिल नहीं किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में शिक्षित अभ्यर्थी आरक्षण के हिसाब से नहीं हैं।
एक्सपर्ट व्यू : ये तो नहीं रखते इत्तेफाक
साक्षरता के प्रतिशत का आंकड़ा वल्र्ड बैंक से लोन लेने के लिए बनाया गया है। इस अभियान में असाक्षर भी हस्ताक्षर करना सीख गए हैं, लेकिन सही मॉनिटङ्क्षरग नहीं होने के कारण पठन-पाठन और आगे का कोर्स सही तरीके से इनका पूरा नहीं हो पाया। और आकड़े तैयार कर लिए गए।
-पीसी खोडियार, शिक्षाविद्
सच्चाई पर बहुत ज्यादा भरोसा नहीं
इस प्रकार के आकड़ों की सच्चाई पर बहुत ज्यादा भरोसा नहीं किया जा सकता है। आंकड़े सिर्फ इतना इंडिकेट करते हंै कि देश में या जिले में साक्षरता कुछ बढ़ी है। इसके लिए सरकार और समाज दोनो जिम्मेदार है। क्योंकि समाज के अधिकांश चाहते हैं कि सबकुछ सरकार करें।
-प्रभात त्रिपाठी, लेखक,साहित्यकार
Published on:
02 May 2018 02:05 pm
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