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केंद्रीय कृषि कानून के समर्थन और विरोध में भाजपा-कांग्रेस ने सोशल मीडिया को बनाया हथियार

- पार्टी के वरिष्ठ नेता कानूनों के बारे में फैले भ्रम को दूर करने कर रहे पोस्ट- इधर, कांग्रेस ने भी किसानों के समर्थन में खोला मोर्चा
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modi Government anti-farmer, mp congress party said

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रायपुर. केंद्रीय कृषि कानून को लेकर एक ओर से जहां किसान सड़क की लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सत्ता और विपक्ष के नेता भी सोशल मीडिया में मोर्चा खोलकर बैठे हैं। स्थिति यह है कि सत्ता और विपक्ष के बड़े नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट में मर्यादा दिखाई देती है, लेकिन छोटे नेताओं के पोस्ट में लिखे शब्द अपनी सारी सीमाएं लांघ रहे हैं। फिलहाल भाजपा के नेता सोशल मीडिया को हथियार बनाकर कृषि कानून को लेकर फैले भ्रम को दूर करने का काम कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस के नेता सरकार की नीति और नीयत दोनों पर सवाल उठाने से नहीं चूक रहे हैं।

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने केंद्रीय कृषि कानून को लेकर फैले भ्रम को दूर करने की जिम्मेदारी अपने सांसदों को दी थी। कुछ हद तक सांसद किसानों तक अपनी बात पहुंचाने में कामयाब भी हुए, लेकिन उसके नतीजे निराशाजनक रहे। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय मंत्रियों को मोर्चा संभालना पड़ा।

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पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री की मन की बातों को सोशल मीडिया में शेयर किया है। इसमें कृषि बिल की फायदों की जानकारी दी गई है। वहीं राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय ने डीडी न्यूज के हवाले से छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के किसान महेंद्र कुमार के बयान को सोशल मीडिया में शेयर किया है। इसमें किसान की तरफ से यह बताने का प्रयास हुआ है, पहले उन्हें अपने धान की उचित कीमत नहीं मिल पाती थी, लेकिन नए कृषि सुधार कानूनों के माध्यम से उनकी ये परेशानी हल हुई है।

किसानों के समर्थन में कांग्रेस का अभियान
केंद्रीय कृषि कानून के विरोध में कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया पर स्पीकअप फॉर फार्मर अभियान शुरू कर रखा है। इसमें प्रदेश कांग्रेस के नेता सोशल मीडिया में अपना वीडियो या पोस्ट शेयर कर खुलकर अपनी बात रख रहे हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी इस अभियान का हिस्सा बने और उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा था कि अन्नदाता की रीढ़ को कमजोर करने का अर्थ है इस देश की आर्थिक नींव को कमजोर करना।

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अहंकार में डूबे लोग अभी अपने पूंजीपति मित्रों के हितों के आगे किसी की न तो सुन रहे हैं, न सच स्वीकार रहे हैं। किसान विरोधी काले कानूनों के विरोध में पूरा देश आज किसानों के साथ है। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने भी अभियान का हिस्सा बनते हुए लिखा है, किसान हमारे देश में माता अन्नपूर्णा के सजीव स्वरूप हैं। जिनकी मेहनत और प्रयासों से हर थाली में भोजन आता है, खाद्य उद्योग चलते हैं, देश की आर्थिक और व्यावसायिक उन्नति होती है, उन्हें दु:खी और असंतुष्ट रखना ईश्वर की अवहेलना के बराबर है।

आंदोलन को तोड़ने से जुड़े पोस्ट
सोशल मीडिया में किसान आंदोलन के समर्थन और विरोध में जमकर पोस्ट लिखे जा रहे हैं। इसके लिए कार्टून का भी सहारा लिया जा रहा है। हालांकि अधिकांश पोस्ट राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों के ही सामने आ रहे हैं।.

मंडी संशोधन विधेयक पर नहीं हुए हस्ताक्षर
देश में केंद्रीय कृषि कानून लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ में विधानसभा का विशेष सत्र आहुत किया गया था। इसमें मंडी संशोधन विधेयक पारित किया गया था। सरकार का दावा था कि इसमें केंद्र के कानून को बायपास नहीं किया गया है, बल्कि प्रदेश के किसानों के हितों की रक्षा के लिए इस कानून में संशोधन किया जा रहा है। विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद इसे राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था। बताया जाता है कि राज्यपाल की ओर से अभी तक विधेयक को मंजूरी नहीं दी गई है। सूत्रों का कहना है राजभवन संशोधित विधेयक के कानूनी पहलु की जानकारी ले रहा है।