
रायपुर . छत्तीसगढ़ की राजधानी के पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी में छात्रों को नियम-कानून पढ़ाने वाला सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर धोखे का प्रोफेसर निकला। उनके खिलाफ नौकरी लगवाने का झांसा देकर कई युवक-युवतियों से करोड़ों रुपए की ठगी की एफआइआर है। गुरुवार को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। विश्वविद्यालय के विधि विभाग की ही एक छात्रा ने उसके खिलाफ 9 लाख की ठगी करने की शिकायत की थी।
मामले का खुलासा करते हुए एएसपी शहर विजय अग्रवाल ने बताया कि विश्वविद्यालय के विधि विभाग में सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर आलेख साहू मंत्रालय के अधिकारियों से संपर्क होने का दावा करता था। उसके पड़ोस में रहने वाले श्यामानंद साहू से उसकी जान पहचान थी।
श्यामानंद की बेटी भी विधि संकाय की छात्रा थी। इस कारण आरोपी आलेख को भी वह जानती थी। आलेख ने दुर्ग विश्वविद्यालय के विधि विभाग में विधि अधिकारी के पद पर नौकरी दिलाने का झांसा दिया। श्यामानंद को उस पर विश्वास हो गया।
फिर आलेख ने वर्ष 2016 में श्यामानंद से अलग-अलग किस्तों में 9 लाख रुपए लिए और 6 माह बाद नौकरी लगवा देने का आश्वासन दिया।6 माह बाद भी छात्रा की नौकरी नहीं लगी। इसके बाद श्यामानंद ने फिर उससे संपर्क किया। आलेख ने एक माह के भीतर नौकरी लग जाने का फिर आश्वासन दिया। एक माह बाद आलेख ने अपना मोबाइल बंद कर दिया। पैसा वापस भी नहीं किया। इसकी शिकायत एसपी से की गई। पुलिस ने जांच शुरू की और आलेख को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी ने अपनी जमीन की बिक्री में भी हेराफेरी की है। मठपुरैना स्थित अपनी जमीन को उसने दो लोगों को बेच दिया है। पैसा वापस करने के लिए अपने नाम का चेक दिया था, जो बाउंस हो गया। उसकी शिकायत पर भी पुलिस जांच कर रही है। श्यामानंद के अलावा आरोपी ने मुकेश कुमार बहरैया, श्याम नंद साहू, प्रियंका सिंह, हरीश साहू, विनय राठौर से अलग-अलग कुल 28 लाख रुपए लिया है।
आरोपी विधि विभाग का प्रोफेसर होने के कारण लोग उस पर आसानी से भरोसा कर लेते थे। आरोपी ने दो दर्जन से अधिक युवक-युवतियों को विभिन्न जगह पर क्लर्क, कंप्यूटर ऑपरेटर, प्रोफेसर और विधि अधिकारी बनाने का झांसा दिया है और किसी से 3 लाख तो किसी से 10 लाख रुपए लिया है। आरोपी के खिलाफ मिले अन्य शिकायतों की भी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
Updated on:
27 Apr 2018 12:11 pm
Published on:
27 Apr 2018 12:11 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
